मिथिला साहित्य–कला प्रतिष्ठान नेपाल MiLAF Nepal द्वारा प्रत्येक मासक अन्तिम शनिदिन आयोजित होइत आएल मैथिली साहित्यिक तथा साङ्गीतिक कार्यक्रमक श्रृंखला : ३९ आ दू माससँ निरन्तर आयोजित ‘यात्रा मिथिलाक गाम गाम’ अभियानक भाषीक-साँस्कृतिक जागरण कार्यक्रम सप्तरीक कलाकारिताक एक विशेष केन्द्र एवं साँस्कृतिक स्थान भारदह स्थित इस्टर्न ज्योती स्कूलक प्राङ्गनमे उक्त स्कूलक प्राध्यापक एवं नेशनल पैव्सन, केन्द्रीय सदस्य थानेश्वर साह आ हनुमाननगर कंकालिनी वाड नं १ क वाड अध्यक्ष भिमराज मण्डलक प्रमुख आतिथ्यमे सु-सम्पन्न भेल। मैथिली अभियानी, कलाकार, संचारकर्मी, शिक्षक एवं विद्यार्थी लगायत कुल ७० गोटेक समुस्थिति रहल उक्त कार्यक्रममे प्रसिद्ध सङ्गीतज्ञ राघव झा, प्रसिद्ध निर्देशक, निर्माता एवं कलाकार कुन्दन मण्डल ‘पप्पु’, प्रसिद्ध हास्य-कलाकार एवं मिथिला अभियन्ता जीवछ दास आ लोकप्रिय हास्य कलाकार महेश मेहता, सप्तरी उद्योग वाणिज्य संघ सदस्य कैलाश दासक विशिष्ट आतिथ्य रहल छल।

कार्यक्रमक शुरूआत स्व. मायानन्द मिश्रक कविता ‘मिथिला : मैथिली’ क वाचनसँ भेल। गायक शुभाष विरपुरिया आ सरोज विरपुरियाद्वारा महाकवि विद्यापति गोसाउनि गीत गाओल गेल। मिलाफ संस्थापक सदस्य शम्भू श्री पछिल्ला जनगणनामे देखल समस्या, षडयन्त्रसभकेँ आ मैथिलीके विशिष्टताक उदाहरण दैत, चित्रण करैत आगूक जनगणनामे सजग रहि अपन मातृभाषा मैथिली लिखबी आग्रह करैत कार्यक्रमक विषय प्रवेश करेलथि। मिथिला देवघर यात्रा संयोजक मिलाफ सह-सचिव शुभाष विरपुरिया अभिभावकसभकेँ सम्बोधन करैत अपन धियापुतामे साँस्कृतिक सँस्कार हस्तान्त्रण करैत रहबाक चाही नहि तँ सँस्कार मरि जेतै कहैत स्वागत मन्तव्य देलथि।

कोन वक्ता कि कहलथि ?

जीवछ दास अपन संचारक्षेत्रक अनुभव व्यक्त करैत मैथिली अभियानक थप विस्तार आ संरक्षण समन्धमे अपन विचार व्यक्त कएलथि।

महेश मेहता ‘कहब तँ कहबै कहैए’ व्यङ्गय कविता वाचन कएलथि आ मातृभाषा मैथिली आ मातृभाषामे शिक्षा कोन तरहे प्रभावकारी होइत अछि से विषयपर अपन तर्क रखलथि। मैथिली भाषाक विशिष्टताक समन्धमे ई उदाहरण देलथि, ” हमर अपने बच्चा बाजै छै ओह्या देने गेलै। हमरा आश्चर्य भेल हम तँ बाजै छी ओही दने गेलै। ई कुन भाँज छै ? धियान देलियै ओकरा माँक बाजबपर। तँ ओकर माँ बजै छै ओह्या देने गेलै। ए ! तही दुआरे ई मातृभाषा छियै। तइँ माएक भाषा सबकेँ ओतबे प्रिय होइ छै जीवनमे। कोनो अशुद्धि नइँ। जे माँसँ सिखै छै ओह्या शुद्ध छै। “

कुन्दन मण्डल ‘पप्पू’ माए आ बच्चाकेँ जोड़ि मातृभाषाके परिभाषित कएलथि। ओ कहलथि, “मैथिली एहन भाषा छै जइँ जनमसँ मरैत कालधरिक’ सँस्कारे सँस्कारे गीते नाद छै। अन्य भाषामे अइ तरहक विशेषता नहिये भेटत से दाबी करै छी।” “पढ़ि लिखिक’ दामनाम कमाबितो अधिकांश विद्वान लोक अपन मातृभाषाकेँ छोड़ि दै छै, अपन लोक संग अपन भाषा नइँ बाजै छै। एतेधरि जेँ अपन बौआबुच्चीक मैथिलीसँ दूर राखै छै। कानमे जाए दैलऽ नइँ चाहै छै। अङ्ग्रेजी आ नेपालीमे बौआबुच्ची टैलेन्ट रहल मुदा अपन भाषा बाजल नइँ होइत रहै छै”, कहैत चिन्ता व्यक्त कएलथि आ आन भाषाके सङ्ग अपनो भाषाके प्रयोग करबाक अभिभावकसभसँ आग्रह कएलथि। हिनकर लोकप्रिय रहल ‘सिङ्गी मुङ्गरी’ सिरियलबाद आब आन सिरियलदिस सेहो काज करबाक प्रतिबद्धता

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जनेलथि।



राघव झा कहलथि , ” मैथिली संगीतमे अपनाकेँ समर्पित क’ हम आइधरि मिथिलाकेँ लेल जिलौँ आ जियब। आइधरि बच्चासँ लक’ अखनधरि जइँ मञ्चपर गेलौँ मैथिलीयेटामे गेलौँ दोसर हिन्दी फिल्मी कहियो नइँ। आन भाषी कलाकारके सङ्ग सेहो हम मैथिलीयेमे प्रतिउत्तर दै छी। कारण : आनक भाषा हम बाजब मुदा हमर भाषामे आन नइँ बाजत। ओ कहलथि, ” हम, उदीतनारायण जी आ सुधानन्द जी जत’ जाइत छलौँ सङ्गे जाइत छलौँ । ओही समयमे उदीत जी सेहो कुनौली स्कूलमे ७-८ मे पढ़ैत छलथि। मञ्चपर ओ सभ आनो भाषोमे गाबैत छलखिन हम मुदा मैथिलीयेटामे। ई हमर माएक भाषा लेल अपन जीवनक प्रतिज्ञा छी। ” सूर्य बहादूर सेन ओली रहथि राजाक जन्मदिवसपर एकटा गीत गाबै लेल आमन्त्रित कएलथि। ओ कहलथि नेपालीमे गाबऽ लेल। मुदा हम कहलौँ हम गाएब तँ मैथिलीयेमे गाएब। कतऽ सँ गीत आनब पुछलापर हम कहलौँ। हम अपने लिखब। से लिखलौँ, गेलौँ आनो भाषीसभके पछारैत हम पहिल भेलौँ। ” मैथिली भाषाक सन्दर्भमे ओ कहलथि, ” मैथिली भाषाके लोक आन दृष्टिकोणसँ देखऽ लगलै। ई जाति विशेषकेँ कहिकऽ आ कहबाकऽ। नइँ यौ जते मैथिल छी सभकेँ भाषा छियै मैथिली। अइपर सभकेँ अधिकार ओतबे छै। आइकाइल फूट डालैकऽ लेल ई सब षडयन्त्र करै छै। एकर षडयन्त्रके चिरक’ फेकू अपनासभ।

उक्त स्कूलक शिक्षक मनोज दास अपन विद्यालयमे मैथिली भाषा बाजऽ मे , मैथिलीमे कोनो टॅपीक समझाबऽ आ बुझाबऽ मे आ साँस्कृतिक कार्यक्रम सभमे मैथिली भाषाक प्राथमिकता देल गेल बातक जानकारी करेलथि।

कार्यक्रममे अतिथिक आसनसँ ईन्जिनियर अभिनाष दास अपन बैचलर लाइफमे अपन मातृभाषा आ अपन सँस्कृति पहिचान लेल ईन्जिनियरिङ्ग कलेजमे कएल कार्यसभ अनुभव परसलथि आ युवासभकेँ अपन सुच्चा पहिचानकेँ लेल एकताबद्ध भ’ किछ उदाहरणीय कार्य करैत रहबाक आग्रह कएलथि।

प्रमुख अतिथि भिमराज मण्डल कहलथि, ” मिथिला-मैथिलीक गरिमा, पहिचान कोनो एक गोट नइँ बढ़ा सकै छै। आजुक कार्यक्रममे जेँ शुरूसँ अन्त मन्तव्य सुनलौँ। प्रस्तुति देखलौँ। बौआबुच्चीसँ लक’ शिक्षक, अभिभावक आ मैथिलीकर्मी सबकेँ बराबरि जिमेबारी वहन कया रहल छै सँस्कृतिक गड़ी हाकै लेल। आब दिन दूर नइँ छै। चेतनाक आँखि सभकेँ खूलल जाय रहल छै। हम आइ गदगद छी। भारदहसँ जनचेतनामूलक, माटिपानिक बात युक्त सिरियल निकलै, भारदहमे साँस्कृतिक पहल हो। हमर पाइर सङ्ग रहत मिथिलाक पथपर सभक सङ्ग। जनगणनामे अपन तथ्याङ्कमे सजगतापूर्वक विवरण लिखाबी। “

कार्यक्रमक सभाध्यक्ष उक्त स्कूलक प्राध्यापक थानेश्वर साह मातृभाषामे एकटा विषय अनिवार्य पढ़ाइ हो मावि क्षेत्रमे आ मातृभाषाक सँस्कार घरमे सेहो विद्यार्थीकेँ दैत चली कहैत मातृभाषादिस सजग रही। चेतनशील रही। विद्यार्थीसभसँ मैथिलीमे कविता लिखेबाक, नृत्य, नाटक निरन्तर करेबाक मातृभाषा प्रेम विद्यार्थीसभकेँ विविध माध्यमे जगबैत रहबाक प्रतिबद्धता जनबैत कार्यक्रमक समापन्न कएलथि।



उक्त स्कूलक छात्रा संगीता ठाकुर, सिमरण यादव, प्रेरणा साह, रूबी रानी यादव, पूष्पा मण्डल आ अञ्जली यादवद्वारा सलहेश नृत्य प्रदर्शन कएल गेल। प्रिया झा, सुनिल मण्डल, प्रतिभा यादव आ सन्धया झाद्वारा कविता प्रस्तुत कएल गेल।

राघव झा, कञ्चन झा, शुभाष विरपुरिया, सरोज विरपुरिया, मिना साहद्वारा गीत प्रस्तुत कएल गेल । शम्भू श्रीद्वारा गजल, राज राय, ललिता झा, महेश मेहता आ विद्यानन्द वेदर्दीद्वारा कविता वाचन कएल गेल।

कार्यक्रमक बीच अपन कला-कर्मसँ
भारदहक भूमीकेँ आ मिथिलाक गौरव बढ़ेनिहार राघव झा, कुन्दन मण्डल ‘पप्पू’ आ महेश मेहता’ क गमछा ओढ़ाकऽ आ अबिर लगाकऽ सम्मान कएल गेल।



सान्दर्भिक तर्क, मातृभाषापर महान व्यक्तित्वसभक कहबी, दृष्टिकोण आ कवितात्मक पाँतिक सङ्ग सम्पूर्ण कार्यक्रमक सञ्चालन मिलाफक सचिव विद्यानन्द वेदर्दी कएलथि आ एहि कार्यक्रमक मिलाफ संस्थापक सदस्य राज राय संयोजन कएने छलथि।

 

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