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जिनगी की छै माटिक बासन : अनिल मल्लिक

■ गजल

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भोर साँझ दुपहरिया तक छै
ई जुनि पुछू कहिया तक छै

निन्न आँखिसँ कोश दूर छै
ओढ़ना बिछौना तकिया तक छै

बिसरि गेल लोक पुआ पूरी
फगुआ चौरचन जीतिया तक छै

परती पराँत पड़ल अपनैती
मोनक दूरी जहिया तक छै

दुनियाँसँ गेल लोकक चर्चा
शहर बजार की हटिया तक छै

जिनगी की छै माटिक बासन
जहिया तक छै तहिया तक छै

( ● गजलकार अनिल मल्लिक प्रवासमे रहै छथि। मैथिली भाषा आ मिथिला माटि-पानि लेल सदैव चिन्तनशील छथि से हुनकर रचनासभसँ सहजे आभास होइत अछि। गायनमे सेहो रुचि हुनकर नीक देखल गेल अछि। मैथिली गजल विधामे सशक्त रूपमे कलम निरन्तर चला रहल छथि।)

विद्यानन्द बेदर्दी

Vidyanand Bedardi (Saptari, Rajbiraj) is Founder member of I Love Mithila Media & Music Maithili App, Secretary of MILAF Nepal. Beside it, He is Lyricist, Poet, Anchor & Cultural Activist & awarded by Bisitha Abhiyanta Samman 2017, Maithili Sewi Samman 2022 & National Inclusive Music Award 2023. Email : [email protected]

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