Lyrics

मैथिली गीत: गीतकार अशाेक दत्त

प्रस्तुत अछि गीत…

मैथिली गीत १. जय मिथिला जय जय मिथिला

सोहर साँझ पराती गोसाओनि अनुगुञ्जित जाहि ठाम
हम मैथिल छी मिथिलाके सीता नैहर अछि गाम
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान
जय मिथिला जय–जय मिथिला

तपोभूमि आ ज्ञान भूमिसँ महिमामण्डित ई भू–भाग
धरागर्भसँ सीया जनमलीह मिथिलेके एहन सौभाग्य
धीया गार्गी, मैत्रेयी, भारती मिथिलाके छथि अभिमान
मण्डन अयाची डाक घाघ कालीदास गोनू गुमान
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान
जय मिथिला जय–जय मिथिला

इन्द्रधनुषी संस्कृति हमर अछि अनेको अमर गाथा
दिना भद्री सल्हेस लोरिक दुलरा दयाल हमरे भ्राता
अपने शम्भू उगना बनि क आएल छलाह जाहि ठाम
कण–कणमे अछि रचल–बसल ओहि विद्यापतिके तान
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान
जय मिथिला जय–जय मिथिला

पावन भूमि एहि मिथिलामे बुद्ध महावीरो अएलाह
गौतम, कणाद, कपिल जैमिनी एत्तै दर्शन रचलााह
गंगा कोशी कमला गण्डक बहए वाग्मती बलान
सश्य–श्यामल धरा हमर अन्नपूर्णा करथि कल्याण
हमर मिथिला महान हमर मैथिली महान
जय मिथिला जय–जय मिथिला

मैथिली गीत २. एकटा खाड़ा राेटी ला

एक खाड़ा रोटी ला कुकूर बनल लोक अछि
केओ एतऽ मलछैए केओ ककरो झपटैए
रोटीए लए करैत कते देहक व्यापार अछि

अभावकेर धूआँसँ आँखि पथराइ छै
भूखकेर आरीसँ हिरदय चिराइ छै
एहन सन हालमे छै एक नइँ अनेक एतऽ
पेटे बनल जकर जीके जञ्जाल अछि, रोटिए लए

मुँह भ जाइ चून सन देह पीरा जाइ छै
नेनहिमे ठोरसँ मुस्की हेरा जाइ छै
ओकरा नइँ पुछियौ छै नीति आ अनीति कतऽ
खेलबाक बयसमे भेल जे लाचार अछि, रोटीए लए,

कोकनल घाओ जेकाँ जिनगी दुखाइ छै
जुआनी सराप भेल दिन–राति बिकाइ छै
झरकै छै सब दिन जिनगीक उमङ्ग एतऽ
रोटीक भूगोल पाछा बौरल संसार अछि, रोटीए लए 

मैथिली गीत ३. आहत मानव मूल्य भ रहल

आहत मानव मूल्य भ रहल, दहेजक निर्मम वाणसँ
अनन्त वेदना बाध्य भ सहए, मोल चुकाबए प्राणसँ

दहेजक कैंची नितहुँ कतरे, इच्छा आ अभिलाषा
पल–पल काहि काटब भेल छै, जीवनके परिभाषा
उलहन प्रताड़ण लांछन कहाँ, जीबऽ दै छै मानसँ
अनन्त वेदना बाध्य भ सहए, मोल चुकाबए प्राणसँ

न्याय अलोपित भेल समाजसँ, नइँ छै माया दरेग
सुख–चैन हरण भेल जकर छै, ओकरे मोंकए घेंट
लड़ऽ पड़ै छै न्यायक खातिर पहरेदार बेइमानसँ
अनन्त वेदना बाध्य भ सहए, मोल चुकाबए प्राणसँ

आहत मानव मूल्य भ रहल, दहेजक निर्मम वाणसँ
अनन्त वेदना बाध्य भ सहए, मोल चुकाबए प्राणसँ

दहेजक कैंची नित्यहुँ कतरे, इच्छा आ अभिलाषा
पल–पल काहि काटब भेल छै, जीवनके परिभाषा
उलहन प्रताड़ण लांछन कहाँ, जीबऽ दै छै मानसँ
अनन्त वेदना बाध्य भ सहए, मोल चुकाबए प्राणसँ

न्याय अलोपित भेल समाजसँ, नइँ छै माया दरेग
सुख–चैन …

मैथिली गीत ४. फूल आहाँके फुलवारीके

बाबू हम छी छोटकी फूल अहाँके फुलवारीके
हम्मर नइँ करु अखन सङोर बियाहक तैयारीके

अछि निहोरा बुझू बात करु नइँ हमरा संगे घात
अखन पढ़ा लिखा दिअ बियाह बीस बरसके बाद
अजोहेमे कनियाँ बनाएब आमंत्रण वर्वादीके
बाबू हम छी छोटकी फूल ……….

काँच बासनमे पानि जे ढारब त ओ जेतै फूटि
रोग–बियाइधक मारिसँ सुनू प्राणो जाइ छै छूटि
कहूँ जे बच्चेमे बच्चा भेल झेलब केना लाचारीके
बाबू हम छी छोटकी फूल ……….

माँ तूँ बुझै छे सब बात अगिएतै हाथ पएर माथ
शारीरिक मानशिक कमजोरी बच्चा–जच्चा साथ
तखन कोन उपाय क सकबे धीया अपन दुलारीके
बाबू हम छी छोटकी फूल ……….

मैथिली गीत ५. सब धन अछि बाइस पसेरी

सब धन अछि बाइस पसेरी, तौलू अपने राज अछि
निमुँहाँ हुकरौ कि मरौ, ओकरासँ कोन काज अछि

सत्ता सत्ते होइ गुणघिच्चू, पछिला सब बिसरबै छै
आगा भरल बखारी दिश, बढ़ऽ ला उकसऽबै छै
पहिले जे लूटलक से लूटलक, अखन अहींके भाँज अछि
निमुँहाँ हुकरौ कि मरौ ……

सल्लाहकार चापलुसे बढियाँ, हँमे हँ मिलाएत
दरवार सजौने रहत सदिखन, सब टा टहल बजाएत
निक बेजाए जे कहए बुभू, नमरी पिङ्गल सरदार अछि
निमुँहाँ हुकरौ कि मरौ ……

अधिकार सम्मानक नगाड़ा, समय आएत फेर पीटब
धूरा–गर्दा आँखिमे झोंकब, चुनाव निश्चय जीतब
जे लुल्ह नाङर भेल जान गमौलक, ओ पछिला सन्ताप अछि
निमुँहाँ हुकरौ कि मरौ …..

Ashok Dutta

गीतकार

अशाेक दत्त
जनकपुर,धनुषा,नेपाल

Gajendra Gajur

गजेन्द्र गजुर जी एहि वेबसाइटक सम्पादक छथि। [email protected]

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