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साँस्कृतिक परम्पराक हाल-बेहाल :

आगामी कार्तिक १ गते दुर्गापूजा प्रारम्भ भ’ रहल अछि । कलस्थापन होबएके समयके आनन्दके हटले अनुभूति होइत छल । एहि बेर संभवतः कोनो बलिप्रदान नहि हएबाक, भीड़भाड़ नहि हएबाक अर्थात जनकपुरधामके विजयादशमी मात्र सामान्य पूजाक सँग मनएबाक भेल अछि ।

ई अवस्था दुर्गा पूजाक मात्र नहि अछि । आबएबला लक्ष्मीपूजा (दीपावली), छठिके सेहो मात्र विधि पहुँचाबएबलो पूजा उत्सव हएबाक संभावना अछि । जाहि गतिसँ कोरोनाके प्रकोप बढि रहल अछि आ देशमे खुल्ला आवत–जावत, स्वास्थ्य सुरक्षाके अबहेलना भ’ रहल अछि, ताहिसँ तस्वीर आओर भयावह हएबाक संकेत आबए लागल अछि । सरकार उपदेश आ निर्देश मात्र दैत आएल अछि । उपचार सुरक्षाप्रति सम्वेदनशील नहि देखल गेल अछि । पहिने, लक्षण देखल गेलाक बाद मात्र जाँच करबाक बात कहलक बादमे लक्षण नहि भेलाक बादो संक्रमित अत्याधिक बढलाक बाद पुनः नयाँ–नयाँ आदेश देबए लागल अछि ।

कोरोना उपचारमे कोन पद्धति कारगर होबए सकत, ई सरकार समझए नहि सकल अछि । आयुर्वेद चिकित्सासँ बहुत फाइदा भ रहल बात विज्ञसभ कहि रहल समयमे आयुर्वेद प्रतिष्ठान रहल क्षेत्रभितर उपचाररत रोगीसभके मात्र ताहि विधिसँ उपचार हएबाक, अन्यके उपलब्ध नहि करा सकबाक कहल गेल अछि । जखन कि ओहि प्रतिष्ठानक प्रमुख आयुर्वेदक औषधि सेवनसँ धमाधम ठिक कएने दावी करैत आएल अछि । यदि औषधि उपयागी अछि त तकर उत्पादन किए ने राज्यव्यापी पहुँचके आधारमे कएल जा रहल अछि । आयुर्वेद उत्पादनसभके साइड इफेक्ट नहि भेलासँ कओे गोटे उपयोग क सकैत अछि । एम्हर सरकारके ध्यान नहि गेनाई अथवा जानिजानि सिमित कएनाई दुखद पक्ष मानल जा सकैत अछि ।

सामाजिक दृष्टिसँ देखलापर एखनके महामारीमे जाहि प्रकारसँ कोरोनाके कहर जारी अछि, ओहिमे हमरासभके अपने सतर्क होबए पडत । प्रशासन अपन आदेशमे भीडभाड होबएबला पावनि तिहार, पूजा–पाठ अथवा अन्य सामाजिक सांस्कृतिक उत्सवसभ आदेशसं नहि रोकए धरि हमसभ सतर्क होबए नहि चाहैत छी । सामाजिक दुरी आ मास्कके अभावमे कोनो क्षण अप्रिय घटना होब’ सकबाक जवावदेही नागरिक समाजके सेहो लेबए पड़त ।

जनकपुरधामके दुर्गापूजा सादगीपूर्ण ढंगसँ मनाबए लेल प्रशासनक कएल निर्णय प्रति असन्तोष सेहो भ’ सकैछ मुदा सतर्कताके कारण सेहो ताम–झाम कम हएबाक चाही से त पक्का अछि । मुदा ओही ठाम, मलेमासमे लागएबला गौरका मेलाक लेल प्रशासन कोनो चाँखि नहि लेलाक कारणें नागरिक समाज, स्थानीय सरकार वा संघसंस्थासभ कोनो रुची नहि लेलक आ आई ट्रैक्टरके ट्रैक्टर दर्शनार्थी, स्नान करएबलासभ नदीके कातमे पहुँचि सम्पूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा प्रति लापरबाही देखा रहल अछि ।
अश्चर्य तखन लगैत अछि–जनस्वास्थ्यके कारण सेहो पहल क स्थानीय वा प्रदेश सरकार ओहि ठाममे स्वास्थ्य चेतना जगाबएबला कोनो प्रकारके सुरक्षा बन्दोबस्त मिलाबए सकैत त किछु हदधरि खतरा कम त पक्का होइत । मुदा ओहि दिस कोनो प्रयास कएल गेल पंक्ति लेखकके कोनो जानकारी नहि आएल अछि ।

ई सत्य अछि, एखनुक विकट परिस्थिति हमरासभके सांस्कृतिक परम्परा आ लोकोत्सवसभके हमरासभसँ दूर ल’ जाएके चाहि रहल अछि । मुदा आश करी ई सदैबके लेल नहि अछि । फेर समय परिवर्तन हएत । आ हमसभ आओर उत्साहसँ एहिमे लागब ।

वर्तमान अवस्थामे जखन सरकारसभ अपन–अपन हाथ ठाढ़ क’ चुकल अछि, नागरिकके अपने सुरक्षामे बाँचएके बाध्यकारी अवस्थाके सृजन करए लागल स्थितिमे नागरिक समाजके सुरक्षाके चेतनामुलक दायित्व लेबए पड़त आ समाजके खतरासँ बँचए लेल सतर्क होबएके आग्रह करए पड़त।

एकटाक सर्तकतासँ अनेकोके बँचबाक अधिकार सुरक्षित होइत अछि । हमसभ अपन दायित्वके बुझी आ ओहिके निर्वाह करी ।

© लेखक : राम भरोस कापड़ि ‘भ्रमर’

Vidyanand Bedardi

विद्यानन्द वेदर्दी जी एहि वेबसाइटके सम्पादक छथि। Email - [email protected]

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