चर्चित गीतकार अयोध्यानाथ चौधरीक पाँचटा गीत प्रस्तुत अछि।

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१.

पहिल प्रेमक पहिल निवेदन
कोना करी किछु नै   जानी
प्रेमभावसँ उबडुब तनमन
कोना बढी से नै  जानी

पहिल नजरि अद्भुत आमन्त्रण
हम तँ मात्र एतबे जानी
अहाँक अनुभव, नेह- निमन्त्रण
ओ तँ मात्र आहाँ जानी
किछु नव बात जरुर भेल छै
अहाँ जानी, हमहुँ जानी….
पहिल प्रेमक….

घटना जीवनकेर सुन्दरतम
छै घटित भेल से अहूँ जानी
कथ्य कठिन आ भाव अन्यतम
आ छी एके सन अज्ञानी
शिशुक शब्द स्फुटित भेल छै
आनी-मानी किछु नै जानी…पहिल प्रेम…

(“चली, किछु गुनगुनाली” संग्रहसँ)


२.

बेटी जनम लेथि अनका लय
केहेन विधान , हाय विधना ।
समदाओन संग नोरमे डूबल
सुन्न लगैछ आइ अंगना ।।

पिया  देश उडल ओ पंक्षी
नव परिवेश , रमिते ओ जेतै ।
शिष्ट अपन ब्यबहार-वचनसँ
दुनू कुलकेर लाज जोगेतै ।।

नारी  ओ साड़ीमे सुसज्जित
अपन परिधानमे कतेक नीक
नहुँ नहुँ बाजथि , बनलि सुस्मिता
अजस्र सिनेहकेर बनल प्रतीक ।।

मुस्कान ठोर प्रतिपल पसरल
चमकि उठथि कतउ अंगनामे
खन एमहर , खन ओमहर काजमे
सा  रे  ग  म  बाजनि कंगनामे ।।

सासु , ससुर , साजन आ सब प्रति
सिनेह यथोचित , शिष्ट ब्यबहार ।
अंगना बनल , स्वर्ग – सन सुन्दर
सब   संतुष्ट ,  ज्ञानक   अम्बार ।।

एहेन भागवन्ती कनियाँ पाबि ,
दुनू  कुलकेर  होइछ उद्धार ।
नैहर – सासुर  दुहुठां उद्भासित ,
जतइ नै रहथि , ओतइ अन्हार ।।

( “चली………किछु गुनगुनाली”) संग्रहसँ

३.

छै कते दिब्य पसरल पूनम- रोशनी
सौंसे आंगन खुशीमे नहा छै रहल
आइ तँ साँझेसँ चान उदित भेल छै
सब खुशी बनि नदीमे दहा छै रहल

आइ त्रिबेणी-संगमपर मेला छै लागल
पूब-पश्चिम आ आनो दिशा सब मिलल
आइ ने बादलके कतौ कोनो लेस छै
अपूर्ब मिलन भेल छै,सब छै मुस्का रहल
छै कते……….

केओ कोम्हरो जेतै,केओ कोम्हरो जेतै
काल्हुक  ठेकान कहिया  छै  रहल
जे बाँचल छै ओहो काल्हि नम्हर हेतै
काल्हि जेतै ओहो सुन्न लगतै महल
छै कते…………..

मिलन-बिछुडन-मिलन दुनियाँके छै रीत
जे रहैछै ,सहैछै, होउ केहनो जहल
पाथरो पिघलि जाइ छै पाबि प्रेम  प्रीत
तइँ तँ माफी मंगै छै लोक कहल-सुनल
छै कते………….

४.

नमित नयनसँ नेह हे
बादरि बनि बरसू
सुन्दर , सुलभ सिनेह हे
आहाँ सब दिन परसू

नव प्रसून सन सुन्दर आनन
पहिल प्रस्फुटित अछि एहि कानन
सुन्दर आश लगौने सब केओ
मुदित भेल सौंसे घर सब केओ
काँच कली कचनार हे
सिनेह-रस परसू
नमित नयनसँ

एखन त’ आंगन अनचिन्हार अइ
नव-नव रीति आ’ नव ब्यबहार अइ
सासु-ससुर सब आश लगौने
सहजहिं सबकेँ चित्त बुझौने
किसलय बनैत किशोर हे
एहिना नित्त हरषू
नमित नयनसँ

५.

चलि जो कोरोना आब तों ,
असह्य   दु:ख  तों   द’ गेलें
चीनक   बुहान   प्रान्त   सं
कोन देश होइत तों आबि गेेेलें

लौकडाउन के कारणसँ ई
जीवन तँ पंगु छै बनल
गोटी , दबाई  किछु नै
समयक नै छै सीमा एकर
सम्बन्ध सब अछि टुटि रहल ,
निर्मम कोना एहन भेलें
चलि जो कोरोना

बिनु काजकेर सब आदमी
घर तँ लगैछै आब जहल
जीवन कोनाक’ चलतै आब
छै पाइ , अन्न   सब  घटल
लाखों मरल आ मरिते अइ
ई काज तों केहेन केलें
चल जो कोरोना

के   अमीर ,   के   गरीब
हाहाकार छै सबठाँ मचल
चान , मंगलपर   चढ़ल
एहिठां किए ने सफल रहल
पड़ोस , सर  – समाजसँ
बिश्वास तों उठा देलें
चलि जो कोरोना

ककरोसँ केओ ने बजैत छै
संकेतसँ मात्र  पुछैत छै
दूरेसँ बाट   कटैत    छै
लागय जेना ने चिन्हैत छै
हरदम त्रसित छै सब बनल
जीवन निराश बना देलें
चलि जो कोरोना

@ गीतकार : अयोध्यानाथ चौधरी
पत्ता : जनकपुुुुुरधाम,धनुुषा

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