Poem

राकेश कुमार झाक पाँचटा कविता

१. मधेशक दशा – बोध

हे चन्द्रचूड , हे जगन्नाथ , हे विश्वम्भर विश्वनाथ ,
हे महाकाल , हे भुतनाथ , हे प्रएलंकार लोकनाथ,
हे दीनबन्धु,की कहि सुनाउ , एहि मधेशक हाल
मधेशी अछि भयत्रस्त आ वड बेहाल ।
नेपालमे अछि अति विस्तीर्ण प्रपंच जाल ,
ओ ज्ञान कहाँ जे जानि सकत ई नेताक नृत्य ताल ।
हे मधेशी वन्धु, हम्मर – हम्मर केर झंकृत झुम्रिपर,
वेताल नाचिरहल अछि मधेशी नेता सभ ।
शिवि , दधीचि ओ हरिश्चन्द्रक समय कहाँ,
जे दान करत , बलिदान चढत नाम करत सत्यक हितमे ।
हे लोकनाथ, नहि देखिसकब, मधेश मायक दुर्दशा चित्र ,
एकर हृदय– यन्त्रक तार छैक टुटिगेल ,
जीवन–रसक अमृत उदगम छैक सुखिगेल ।
मृत सिकताकढेर पर की उगि सकैछ ,
पत्रित–पुष्पित सुरभित उपवन ।
मद–वस्त वातमे ओ वेग कहाँ ,
जे बनझौआ नेताके गुदगुदा सकत
हे भोलेदानी,मधेशी नेताक उध्र्द चेतना ,
सन्मार्ग सँ अछि कतहूँ भटकिगेल ,
अन्ध विश्वासक खुट्टा बले ,
जक्डल सन अछि किछु अरकिगेल ।
हे जगदीश्वर,भय–तापक भीषण ज्वालासँ
अछि सदगुण कतहुँ पडाएल सन ,
मधेश अछि अधिक झुलसाएल संन ।
हे नाथ,ओ भकजाय नहि कही प्रवल अंगार
तकर पूर्ण आशंका अछि ।
आ मधेशक एहने सन अछि किछु दशा–चित्र ।

२. मिथिला गान

धोति, कुर्ता, पाग, डोपटा ,मैथिल अछि नाम, यौं ।
जनक,जानकी,डिही आ विधापतिक सुन्दर गाम ,यौं ।
दही चुडा,तरुवा तिमन,मखान आ मालदह आम, यौं ।
सभ कियो हात जोडि करु मिथिलाके प्रणाम ,यौं ।
सकडा,राजदेवि, भूमिजा,गढीमाइ, कंकालनीक संदेश, यौं ।
जलेश्वर,मठिहानी ,धनुषा धाम, आ सलहेश, यौं ।
जगत जननी वैदेहीक उपदेश मिथिलाक शान, यौं ।
विश्व प्रसिद्ध छि हमसभ मिथिलाक सन्तान, यौं ।
विकासक हेतु वढिरहल ई लाखो लाख हात,यौं ।
मैथिली भाषाके वचाउ नहि वनू कियो अज्ञात । यौं ।
गंगा सागर,धनुष सागर आ दशरथ तलाउ, यौं ।
चुरे संरक्षण कए ई मिथिलाक भुमी वचाउ, यौं ।
जितिया,विषहरा,डोरा,मधुश्रावनि,जुड सितल, यौं ।
झुमरा,वडका,झिझिया, गोडही,अलाह रूदल, यौं ।
फुलवरीया,मकर,झुला, ई मिथिलाक प्रसिद्ध मेला, यौं ।
सभमिली वचाउ मिथिलाक संस्कृति आ कला, यौं ।
जटजटिन,सामा चकेवा, राम लिला,तरवार नाच, यौं ।
डाइन जोगीन,भूत प्रेत आ अहिठाम पिशाच, यौं ।
जलाधि,वलान,रातो,कोशी, त्रियुगा आ कमला, यौं ।
सुन्दर शान्त विशाल जय जय ई मिथिला , यौं ।

३. हे मैया

असमंजसमे अछि जगक प्राण हे मैया ,
करियौ सज्जनक कल्याण ।।
दिन दुखियाके दुुखित अछि मोन हे मैया ,
करियौ रोगक निदान ।।
असमंजसमे अछि जगक प्राण हे मैया ,
करियौ अवलाके कल्याण ।।
करियौ सभक समस्याक समाधान हे मैया ,
करियौ दुखियाके कल्याण ।।
जाधरि तन मनमे शक्तिक भान हे मैया ,
अहि छि जगक निष्पराण ।।
दियौ सभमे इजोतक ज्ञान हे मैया ,
करियौ कलुषित कायाक कल्याण ।।
अछि छि सभसँ महान हे मैया ,
असमंजसमे अछि जगक प्राण ।।
देखवियौ सभके शान्तिक चान हे मैया ,
सिङ्गरहारक सिङ्गारसँ प्रणाम ।।
आहाँक ह्दयक संतान छि हे मैया ,
ह्रदयक मन्दिरसं बारम्बार प्रणाम ।।

४. दहेज

दहेजक चलल उठल वतास ,
बरक पिता लेलनि साँस ।
डाक्टरक पचास लाख,इन्जिनियरकें पचीस ,
कन्याक पिताके झुकलन्हि सीस ।
वरक पिताके चाही गाडी आ मकान ,
वरदानक नामपर बिक रहल अछि इमान ।
दहेजक चलल उठल वतास ,
दहेजक पैसा व्यपारीक पास ।
दहेज वनल अछि समाजक रोग ,
जिनका बेटी भेल पैसल हुनका सोग ।
दहेजक चलल उठल वतास ,
बरक पिताके दहेजक आस ।
दहेज लेनिहार छथि भिखारी ,
हुनका मुहमे पोतु कारी ।
दहेजक चलल उठल बतास ,
अही प्रथासं बेटी बनलि उदास ।
औं, समाजक विद्धानवर्ग करु दहेजक अन्त ,
कन्यादानसन दान नहि,वनू परोपकारी आ सन्त ।

५. सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर

चौबिसो घण्टा नहि किछु काम,
जिटजाटमे घुमैत छी गाम ।
माय बाबुक दुलारु तारा,
गाजा,हफीम,चरस सारा ।
जेबीमे पाई नहि गुलछर्रा हाटपर ,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।
कम पढल बहुत बुझैतअछि,
ज्ञानी सेहो अज्ञानी बनल अछि ।
मुर्खक वर्चस्व बढिरहल अछि ।
मुर्खक सम्मेलन विद्धानक घाटपर,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।
जिनका ताकत नहि ओ ताकतदार,
देहमे ताकत नहि चलैत अछि काँटपर,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।
लुटि खसोटिक खेबाक बाइन,
होटलमे पिवैत अछि वियर आ वाईन ,
मेहनत नहि,ध्यान समोसा आ चाटपर ,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।
मधेशी सभक एक धन्दा ,
घर पक्की आगूमे गन्दा ।
पिवैत अछि घृत मांगीक चन्दा ।
खाइत अछि घरमे हगैत अछि बाटपर ,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।
भाइ भाइमे हमसभ झगरैत छि ,
जमिन जत्थाकलेल लडैत छि ।
कमैनि धमैनि नहि, ध्यान जमिनक वाटफाँटपर,
सुतल छी खाटपर टाङ्गदुनु टाटपर ।।

□ कवि : राकेश कुमार झा ‘रसिक’


□ पत्ता : जनकपुरधाम – २०
□ जन्म तिथी : २०३२-१०-२७
□ पेशा : नेपाल सरकारक उपसचिव
हाल कार्यरत कार्यालय,नापी कार्यालय
राजविराज,सप्त्तरी

Vidyanand Bedardi

विद्यानन्द वेदर्दी जी एहि वेबसाइटके सम्पादक छथि। Email - [email protected]

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