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मलमास (Intercalary Month) : किछु जनतब

प्रस्तावना :

विक्रम सम्वत २०७७ सालक आसिन २ गते अधिक मास अथवा मलमास प्रारम्भ भऽ रहल अछि । एकर अर्थ ई भेल जे एहि वर्ष गतेक हिसाबेँ तँ आसिन मास एके बेर हएत, मुदा चान्द्र मासक तिथिक हिसाबेँ आसिन मास दू बेर हएत ।  जँ मलमास नहि पड़ल रहितए तँ एहि वर्ष शारदीय नवरातिकलेल कलशस्थापन आसिन २ गते होइतए, मुदा से नहि भऽ एहि वर्ष कलशस्थापन कातिक १ गते हएत । एहि ठाम प्रश्न उठैत अछि जे एना किएक होइत अछि ? मलमास किएक पड़ैत अछि ?मलमास नइँ हएत तँ की हएत ? एहन जिज्ञासासभ स्वाभाविक रूपेँ उठैत रहैत अछि । प्रस्तुत आलेखमे एही तथ्यसभकेँ स्पष्ट करबाक किछु प्रयास कएल गेल अछि ।

भूमिका :

विश्वभरि अनेक प्रकारक सम्वत्सर प्रचलनमे अछि,जेना विक्रम सम्वत, शक सम्वत, बँगला सम्वत, इस्लामी हिजरी सम्वत, ईशवी सम्वत आदि । लगभग हरेक सम्वत्सरमे बारहटा मास होइत अछि । मुदा माससभमे दिनक संख्या अलग-अलग होइत अछि । ईसवी सनमे माससभक दिनक संख्या निश्चित अछि । जेना, फरवरी मासमे तीन सालधरि २८ दिन आ प्रत्येक चारिम सालमे २९ दिन होइत अछि । सितम्बर, अप्रिल, जून आ नवम्बरमे ३०-३० दिन होइत अछि आ बाँकी सात महिना ३१-३१ दिनक होइत अछि । विक्रम सम्वतक माससभमे दिनक संख्या २९ सँ ३२ धरि होइत अछि ।

की अछि ई सौर मास आ चान्द्र मास  ?

विक्रम सम्वत, हिजरी सम्वत आदिकेँ माननिहारकलेल मास दू प्रकारक होइत अछि :
(१) सौर मास
(२) चान्द्र मास ।

(१) सौर मास : एहि मासक सम्बन्ध सूर्यसँ होइत अछि । पृथ्वीक वार्षिक गति अर्थात परिक्रमण (rotation) क कारणसँ सूर्य विभिन्न राशि दऽ कऽ जाइत प्रतीत होइत अछि । सूर्य एक राशिसँ दोसर राशिधरि जतेक समयावधि व्यतीत करैत अछि, ओहि अवधिकेँ एक सौर मास कहल जाइत अछि । राशिक संख्या बारहटा अछि, तएँ मासक संख्या सेहाे बारह अछि । बैशाखमे मेष संक्रान्ति हाेइत अछि ।एहिना राशिक क्रमानुसार संक्रान्ति होइत जाइत अछि आ चैतमे मीन संक्रान्ति होइत अछि ।

एक राशिसँ दोसर राशिक दूरी एक्के तरहक नइँ अछि, तएँ माससभमे दिनक संख्या अलग-अलग होइत अछि । बारहटा सौर मास अर्थात एक वर्षक मान ३६५ दिन ६ घण्टा ९ मिनट १०.८ सेकेण्डक होइत अछि ।

सामान्यत: ३६५ दिनक एक वर्ष होइत अछि । आ बाँकी रहल लगभग ६ घण्टाक समयावधिकेँ  चारि वर्षपर जोड़ि देल जाइत अछि अर्थात ६×४=२४ घण्टा=१ दिन जोड़ि प्रत्येक चारिम वर्षमे वर्षक मान ३६६ दिनक होइत अछि । ईसवी सनमे फरवरी मासमे ई एक दिन जोड़ि देल जाइत अछि । एहि ३६६ दिनक वर्षकेँ अधिक वर्ष (leap year) कहल जाइत अछि ।

सूर्यकेँ पृथ्वीद्वारा कएल जाइत परिक्रमण,लगभग ३६५ दिन ।

(२) चान्द्र मास : एहि मासक सम्बन्ध चन्द्रमासँ होइत अछि । सूर्य आ चन्द्रमा जाहि दिनमे एक्कहि राशिपर रहैत अछि, ओहि दिनकेँ अमावश्या कहल जाइत अछि । अमावश्याक दिन सूर्य आ चन्द्रमाक गति अन्तर शून्य अक्षांश होइत अछि । तहिना जाहि दिनमे सूर्य आ चन्द्रमा सोझी-सोझी अर्थात १८० डिग्रीक अन्तरपर होइत अछि, ओहि दिनकेँ पूर्णिमा कहल जाइत अछि ।

चन्द्रमाक गति सूर्यसँ प्राय: तेरह गुना बेसी अछि । सूर्यमे त’ गति नइँ होइत अछि, मुदा सूर्यक गतिक अर्थ होइछै सूर्यक सोझासँ राशिसभक गुजरबाक गति । जखन सूर्य आ चन्द्रमाक गतिमे १२ डिग्रीक अन्तर भऽ जाइत अछि, तँ एकटा तिथि बनैत अछि । एहि तरहेँ ३६० डिग्रीक आकाश-मण्डलमे ३६०÷१२ = ३० टा तिथि निर्माण होइत अछि । तएँ चान्द्रमासमे ३० टा तिथि होइत अछि ।

चान्द्र मासक प्रकार :

चान्द्र मास दू प्रकारक होइत अछि :

(क) अमान्त मास : ई मास शुक्ल पक्षक प्रतिपदासँ अमावश्याधरि ३० तिथिक होइत अछि । हिन्दू परम्परामे चान्द्र मासक प्रारम्भ शुक्ल प्रतिपदासँ कृष्ण प्रतिपदाधरि होइत अछि । इएह कारण अछि जे पञ्चाङ्गसभमे शुक्ल पक्षक प्रतिपदाकलेल १, पूर्णिमाकलेल १५ आ कृष्ण पक्षक अन्तिम तिथि अमावश्याकलेल ३० अङ्क अंकित रहैत अछि । अमावश्यामे अन्त होएबाक कारणेँ एहि प्रकारक मासकेँ अमान्त मास कहल जाइत अछि । मिथिलामे अमान्त मासक मान्यता मलमास अारम्भ करबाक समय अादि विशेष परिस्थितिमे हाेइत अछि ।

(ख) पूर्णिमान्त मास : सामान्यत: शुक्ल पक्षसँ पक्षक आरम्भ होइतो  व्यवहारमे मासक आरम्भ कृष्ण पक्षसँ कएल जाइत अछि । अर्थात कृष्ण पक्षक प्रतिपदासँ चान्द्र मासक आरम्भ आ शुक्ल पक्षक अन्तिम दिन, पूर्णिमाक दिन मासक अन्त होइत अछि । पूर्णिमाक दिन अन्त होएबाक कारणेँ एहि तरहक मासकेँ पूर्णिमान्त मास कहल जाइत अछि । मिथिला क्षेत्रमे सामान्यतः पूर्णिमान्त मासक व्यवहार अछि ।

की अछि अधिक मास अथवा मलमास नामक औचित्य ?

चान्द्र मास २९ दिन ३१ घटी ५० पल ७ विपल ३० प्रतिपलक होइत अछि । एहि काल गणनाक आधारपर एकटा चान्द्रवर्ष ३५४ / ३५५ दिनक हाेइत अछि । एहि प्रकारेँ सौरवर्षमे रहल ३६५ / ३६६ दिनसँ चान्द्रवर्षक दिन संख्या लगभग ११ दिन कम भऽ जाइत अछि ।

एहिसँ समस्या ई होइत अछि जे प्रत्येक वर्ष सौरवर्ष आ चान्द्रवर्षमे होइत गेल लगभग ११-११ दिनक अन्तरसँ मासक नाममे आ सबसँ बेसी तऽ चान्द्र मासक मोताबिक होइत पावनि-तिहारक समयमे अन्तर होइत  जाइत अछि । तएँ चान्द्र मासक हिसाबेँ अन्तर भेल ११ दिनकेँ प्रत्येक दू वर्षक बाद तेसर वर्षमे  जोड़िक’ १ टा मास दोहरा देल जाइत अछि । एहि दोहराएल गेल मासकेँ अधिक मास कहल जाइत अछि । दू वर्षक शेष (मल) क रूपमे रहल ई मास मलमास सेहो कहाइत अछि ।

कहिआ होइत अछि मलमास ?

उपर देल गेल तथ्यसँ स्पष्ट भऽ गेल हएत जे प्रत्येक तेसर वर्षमे अधिक मास होइत अछि । सामान्यतः मलमास ३२ मास १६ दिनक बाद आबैत अछि । विक्रम सम्वत २०७१ मे भादबमे , २०७३ मे अषाढमे आ २०७५ मे जेठमे मलमास भेल छल अा ई माससभ दू- दू बेर भेल छल । एहि वर्ष २०७७ मे आसिनमे मलमास अछि आ २०७९ मे चैतमे मलमास हएत । मलमास अर्थात अधिकमास कोन मासमे हएत अर्थात कोन चान्द्र मास दू बेर आएत, ताहि सम्बन्धमे सामान्य गणित ई अछि जे जाहि चान्द्र मासमे सूर्यक संक्रान्ति नहि होइत अछि से अधिक मास भऽ जाइत अछि । ई गप पहिनहुँ स्पष्ट भऽ चुकल अछि जे जाहि राशिपर सूर्य सोझा-सोझी आबि जाइत अछि, ओहि राशिक संक्रान्ति होइत अछि । एहि तरहेँ जाहि चान्द्र मासक शुक्ल प्रतिपदा (१ अंकित तिथि) आ कृष्ण प्रतिपदा (३० अंकित तिथि) क मध्यमे  सूर्य-संक्रान्ति नहि होइत अछि, ओ मास मलमास होइत अछि । एहि वर्षक आसिन शुक्ल प्रतिपदा संक्रान्तिक बाद २ गते आएल अछि आ तकर बादक अमावश्या संक्रान्तिसँ पहिनहि अासिन ३० गते अछि, तएँ आसिन मासकेँ मलमास मानल गेल अछि । अधिक मास अथवा मलमासकेँ बोलचालमे मलेमास सेहो कहल जाइछै ।

एहि ठाम ईहो जानि लेनाइ आवश्यक होइछ जे जाहि चान्द्रमासक दूनू पक्षमे सूर्य संक्रान्ति होइत अछि, तकरा क्षयमास कहल जाइछ, अर्थात ओहन अवस्थामे एकटा मास हेबे नइँ करैत अछि । मुदा जाहि वर्षमे क्षयमास पड़ैत अछि, ओहि वर्षमे दूटा अधिकमास होइत अछि । ज्योतिष विज्ञान अनुसार जहिआ कहिओ  (लगभग १४१ वर्षक बाद) क्षयमास होइछै, ओ तीनटा मासमेसँ एकटा होइत अछि : कातिक / अगहन / पूस । ई तीनटा मास कहिओ अधिक मास अर्थात मलमास नइँ होइत अछि । बाँकी नओटा मासमेसँ उपर्युक्त गणनानुसार अधिक मास होइत अछि ।

मलमास नइँ हएत तऽ की हएत ?

सौर मास आ चान्द्र मासक समयान्तरक मिलानी अथवा सामञ्जस्य करबाकलेल अधिक मास करबाक बिधान अछि । हिन्दू परम्परामे अधिकांश पावनि-तिहार चान्द्रमासक आधारमे होइत अछि । उदाहरणत: छठि पर्व कातिक शुक्ल षष्ठीक दिन आ दिपावली कातिक कृष्ण अमावश्याक साँझमे होइत अछि । चान्द्रमास आ सौरमासमे दिनक संख्यामे अन्तर होएबाक कारणेँ सौरमासक हिसाबेँ प्रत्येक वर्ष पावनि-तिहार ११-११ दिन पाछाँ (backwards) घुसकैत जाइत अछि । जँ प्रत्येक तेसर वर्ष अधिकमास नहि होए तऽ १० वर्षक बाद, विक्रम सम्वत २०८७ मे,छठि बैशाखमे हएत, जे उचित नइँ हएत । तएँ हिन्दू परम्परामे अधिकमासक व्यवस्था अछि, जाहिसँ पावनि-तिहार आ मासक नाममे सेहो समानता रहओ । इसलामी हिजरी सम्वत सेहो चान्द्रमासक अनुसार चलैत अछि आ पहिल महिना मुहर्रमसँ शुरुह होइत बारहम महिना जिलहिज धरि ३५४ / ३५५ दिनक वर्ष होइत अछि अर्थात सौरमाससँ ११ दिन कम । हिजरी सम्वतमे अधिकमासक व्यवस्था नइँ अछि, तएँ इसलाम धर्मक पावनिसभ प्रत्येक वर्ष ११-११ दिन पाछाँ घुसकैत रहैत अछि ।  एही कारणेँ एहि सम्वतक नओम मास,रमजान, प्रत्येक वर्ष पाछाँ घुसकैत-घुसकैत लगभग तीन वर्षक बाद एक मास पाछाँ भऽ जाइत अछि ।

एहिसँ स्पष्ट होइछै जे मलमास चान्द्रमासेटामे होइत अछि, सौरमासमे नइँ ।

मलमासमे की-की नइँ करबाक चाही ?

चान्द्रमासमे होइत आएल पावनि-तिहार अधिक मास अथवा मलमासमे नइँ आयोजित होइत अछि । मुदा सौरमासमे आयोजित कार्यसभ मलमासोमे होइत अछि ।  ई मास पूजा, भक्ति, आराधना, तप, जप, योग, ध्यान आदिकलेल सबसँ अधिक महत्वपूर्ण मानल जाइत अछि । काेनाे अान देवी-देवताक पूजापाठ एहि मासमे नइँ हाेइत अछि अा कहल जाइत अछि जे एहि मासक सम्पूर्ण स्वामित्व भगवान विष्णु अर्थात पुरुषाेत्तम लैत छथि । तएँ मलमासकेँ पुरुषोत्तम मास सेहो कहल जाइत अछि । ई मास भगवानक आराधना आ भक्तिक मास रहैत अछि । एहि मासमे भगवान विष्णुक उपासना कएल जाइत अछि । ई मास उपवास, पूजा पाठ, यज्ञ, हवन, श्रीमद्भागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण आदिक मनन विशेष रूपसँ फलदायी मानल जाइत अछि । अधिकमासक  अधिष्ठाता भगवान विष्णु छथि । तएँ पूरे समय भगवान विष्णुक मंत्रसभक जाप विशेष लाभकारी होइत अछि । नित्य सन्ध्या बन्दन, नैमेत्तिक कर्मसभ, तीर्थस्नान, जातकर्म संस्कार आदि कर्म मलमासोमे कएले जाइत रहैत अछि । मलमासमे बिहारक राजगृह अथवा राजगिरक तीर्थयात्रा कएल जाइत अछि ।

मुदा तिलक, मुण्डन, उपनयन, विवाह ,वेदारंभ,  समावर्तन, गृह निर्माण, गृहप्रवेश, पोखरि खुनेनाइ, मन्दिर निर्माणारम्भ, प्राण प्रतिष्ठा आदि कार्य मलमासमे त्याज्य होइत अछि ।

अन्तमे, ई बुझि लेनाइ आवश्यक अछि जे सौर मासकलेल मलमास नइँ होइत अछि । चान्द्र मासेटाक हिसाबेँ मलमास होइत अछि, दूनू प्रकारक वर्षक समायाेजनकलेल ।

 

लेखक  देवेन्द्र मिश्र

पूर्व अध्यक्ष : – मैथिली साहित्य परिषद, राजविराज

-मिथिला साहित्य कला प्रतिष्ठान नेपाल, राजविराज

सह-सम्पादक : मिथिला साप्ताहिक पत्रिका

सेवा निवृत्त : माध्यमिक शिक्षक आ भाषा प्रशिक्षक

पुस्तक : बगियाक गाछ, मैथिली सामान्य ज्ञान , श्रीमद्भगवद्गीता मैथिली पद्यानुवाद, मैथिली मनोहर पोथी आदि पुस्तकक रचयिता ।

Vidyanand Bedardi

विद्यानन्द वेदर्दी जी एहि वेबसाइटके सम्पादक छथि। Email - [email protected]

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