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भारत रत्न कर्पुरी ठाकुर जीक मैथिली आ मिथिला लेल योगदान ( Karpuri Thakur )

भारत रत्न भारतके सर्वोच्च नागरिक सम्मान छियै जे राधाकृष्णन,नेहरू, मदर टेरेसा, अम्बेडकर,अब्दुल कलाम सहितके प्रदान कएल गेल अछि।

काली शंकर झा,[लेखक] जनवरी २४ के कर्पूरी जयन्ती मनाएल जाइत अछि। भारतीय राजनीति आ विशेष कऽ बिहारक राजनीतिक संगे मिथिला आ मैथिलीक विकासमे सेहो हिनक बड्ड पैघ योगदान रहल अछि। किएकि हम  मैथिली भाषी छी तेॅं कर्पूरी ठाकुर [Karpuri Thakur] क अवदानकेँ गुणैत हुनका प्रति अपन श्रद्धा सुमन अर्पित करैत छी, स्मरण करैत छी… आ भारत रत्नसँ सम्मानित करबाक हेतु प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी जीकेँ आभार व्यक्त करैत छी।

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मिथिला भारतवर्ष आ नेपालक तराईक संयुक्त रूपेँ एकटा विशिष्ट भू-भाग अछि जे अनादिकालसॅं समय-समय पर अपन सपूतक माध्यमे अइँ धराकेँ गौरवान्वित करैत रहल अछि। राजनीति मानुषी जीवनक अभिन्न अंग अछि। मिथिला एहू क्षेत्रमे कतेको प्रणेता ओ दिशा-निर्देशक अइँ देशकेँ देलक जे स्वहितसॅं परे समाजक भलाइक लेल स्वंयकेँ समर्पित कएलनि। एही क्रममे एकटा विशिष्ट नाम अछि: कर्पूरी ठाकुर।

कर्पुरी ठाकुर परिचय

सामाजिक श्रम सोपानमे सेवाक लक्ष्यकेँ चरितार्थ कएनिहार हजाम जातिमे कर्पूरी ठाकुर [Karpuri Thakur] के जन्म 24 जनवरी, 1924 ई. केँ बिहारक समस्तीपुर जिलान्तर्गत पितौझिया नामक गाममे रामदुलारी देवीक कोखसँ भेल रहनि। ई गाम वैह वैनी ग्रामसँ सटल अछि जतसँ 1908 ई. मे क्रान्तिकारी खुदीराम बोस [Khudiram Bose] केँ पकड़ि मुजफ्फरपुर जहलमे फाँसी देल गेल रहनि। कर्पूरी ठाकुरक पिता गोकुल ठाकुर अपन जातिगत पेशा हजामतकेँ अलावे थोड़-बहुत खेती-पथारीक काज सेहो करैत रहथि। कर्पूरी बचपनेसँ कुशाग्र बुद्धिक रहथि। गोकुल ठाकुर अपने अशिक्षित रहथि, तकर मलाल हुनका सदिखन होइत छलनि तेँ बेटाकेँ पढ़ाइकेँ लऽकऽ ओ बेस साकांक्ष रहथि। ओहि समयमे सामाजिक रूपसँ पिछड़ल जातिक सन्तति सभकेँ पढ़ब-लिखब एतेक सहजो तँ नइँ छलै! कर्पूरीकेँ प्रारंभिक शिक्षा गामेमे सम्पन्न भेल।

गुलाम भारतमे पिछड़ा-दलितक बच्चा सभकेँ विद्यालयमे प्रवेश भेनाई जतए कम चुनौतीपूर्ण नइँ छल, ओत विद्यालयमे टिकल रहब तॅ आओर बेसी दुर्लभ बात। ओहि कठिन कालखंडमे गाम-देहातक कोनो पिछड़ल जातिमे जन्मल बच्चाकेँ फर्स्ट डिविजनमे मैट्रिक उत्तीर्ण होएब एकटा पैघ उपलब्धि छल। जखन कर्पूरी जी सी. एम. दरभंगा कॉलेजमे पढैत रहथि तखनुका समय स्वतंत्रता संघर्षक छल।

धीरे-धीरे हिनक मन स्वतंत्रता आंदोलनसँ संबंधित गतिविधि सभ दिस आकृष्ट होमए लागल। छात्र जीवनेसँ जतय कतौ अन्यायक खिलाफ बजबाक अवसर लागनि ओ कखनो नइँ चूकथि। 1942 मे महात्मा गाँधी जीक नेतृत्वमे भारत छोड़ो आंदोलनक शंखनाद भेल, युवा कर्पूरी अपनाकेँ रोकि नइँ सकल आ पढ़ाइ छोड़िकऽ आंदोलनमे शामिल भऽ गेलथि। हिनका गिरफ्तार कऽकऽ जहल भेज देल गेलनि जतय हिनका 26 मास समय बीतबऽ पड़लनि। स्वतंत्रता आंदोलनसँ निकलल मूल्य, समाजवादी विचारधारा, गाँधी जी केर जीवनक आदर्श हिनक राजनीति जीवनकेँ बेस प्रेरित ओ प्रभावित कएलक। उपलब्ध जानकारीक मोताबिक आजादीक आंदोलन ओ सामाजिक न्यायकेँ संघर्षक दौरान हिनका बीस बेर जहल जाए पड़लनि।

कर्पुरी ठाकुरक महान विचार

कर्पूरी ठाकुर छात्र जीवनेसँ समाजवादी नेता डॉ लोहिया, मधुलिमये, नरेन्द्र देव, जयप्रकाश नारायण आदि लोकनिक संपर्कमे आबि गेल रहथि। हिनका सभक सानिध्य पाबि कर्पूरी जीक चेतना विस्तृत आ प्रखर हुए लागल रहनि। 1971 मे हिनका बिहारकेँ पहिल गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनबाक गौरव प्राप्त भेलनि। ई सरकार मात्र 163 दिन चलि सकल। आपातकालक बाद भेल चुनावमे देशव्यापी इंदिरा विरोधी लहरि पर सवार जनता पार्टीकेँ बिहार विधानसभामे प्रचंड बहुमत भेटल। कर्पूरी ठाकुर जी दोसर बेर 24 जून 1977 सँ 21 अप्रैल 1979 ई. धरि मुख्यमंत्री रहलथि [1]। सरकारक संचालनमे नइँ तँ ओ कोनो अवांछित हस्तक्षेप कखनो बर्दाश्त कएलनि आ नइँ अपमानक मध्य कखनो विचलित भेलथि।
हुनक कहब छल:-

“हक चाहिए तो लड़ना सीखो
कदम कदम पर अड़ना सीखो
जीना है तो मरना सीखो”

कर्पूरी ठाकुर शिक्षाक महत्त्वकेँ नीकसँ बूझैत रहथि। ओ जनैत छलथि जे पिछड़ा, दलित, शोषित, वंचित एवं महिलामे शिक्षाक प्रसार-प्रचार कएने बिनु विकसित समाज ओ उन्नत राष्ट्र निर्माणक सपना कखनो पूर्ण नइँ भऽ सकैत अछि। ई ओहेन दौर छल जखन वंचित समुदायक पहिल पीढ़ी शिक्षासँ जुड़बाक कोशिश कऽ रहल छल। अनुन्नत समुदायक छात्रक सभसँ पैघ समस्या छल – अंग्रेजीक अनिवार्यता आ स्कूलमे फीसक भुगतान। अइँ वर्गक पहिल पीढ़ीक बच्चा अंग्रेजी भाषाकेँ लऽकऽ असहज रहैत छल। साथे बहुतो अभिभावक फीसक भुगतान नइँ कऽ पबैत छल। मजबूरन बच्चा सभ बीचहिमे अपन पढ़ाइ छोड़ि दैत छल। आ जे केओ हिम्मतो करैत छल ओहिमे अधिकांश अंग्रेजीमे फेल भऽ जाइत रहए, फलस्वरूप उच्च शिक्षामे बेसी केओ आबिये नइँ पबैत छल।

ओहि समयमे मैट्रिकक परीक्षामे शामिल भेनाइ आ फेर असफल होएब सेहो एकटा डिग्रीए सन छल आ अइँ डिग्रीक नाम छल-मैट्रिक फेल। अइँ समस्यासँ निदान हेतु कर्पूरी ठाकुर अपन कार्यकालमे अंग्रेजीक अनिवार्यता खत्म कऽ देलनि आओर पहिने आठ धरि आ फेर बादमे मैट्रिक धरि शिक्षा मुफ्त कएलनि। ओहि क्रममे बिना अंग्रेजी पास करऽ वला छात्र सभकेँ ‘कर्पूरी डिविजन’सँ पास कहि मजाक उड़ाओल गेल। मुदा अइँ ऐतिहासिक निर्णयक परिणाम रहल जे बिहारमे शिक्षाक क्षेत्रमे कमजोर वर्गक छात्रक भागीदारी सेहो बढ़ल। कहि तॅ आइयो बिहारमे अंग्रेजीक संबंधमे शासनक शैक्षणिक नीति कर्पूरी ठाकुरक सोचकेँ अनुशरण करैत अछि।

कर्पुरी ठाकुरके मैथिलीमे योगदान

कर्पूरी जीक मानब छल जे भाषा छात्रक बौद्धिक विकासमे सहायक बनै, अवरोध नै। संभवतः हुनके मुख्यमंत्रीत्व कालमे पहिलबेर मैथिलीमे पाठ्यपुस्तक छपल। मैथिली आइ भारतीय संविधानक अष्टम अनुसूचीमे अछि। ओना तँ ई २००३-०४ मे संविधान में जगह पाओलक मुदा एकर बीजारोपण ओ संघर्ष बहुत पहिने भऽ गेल छल। जहिना कोनो भवनक निर्माण होइत छै आ लोककेँ केवल बाह्य भाग जेना ओकर रंग-टीप ओ सुन्दर नक्काशी मात्र देखाइत छै आ एकर आधारशीला दिसि प्रायः लोकक ध्यान नइँ जाइत अछि। तहिना मैथिलीक संबंधमे सेहो बुझाइत अछि। अइँ प्रसंगे जखन कतौ कोनो संगोष्ठी होइत अछि तखन एकर पाछूक संघर्ष ओ बीजारोपण कएनिहार व्यक्तित्व सभकेँ प्रायः बिसरा देल जाइत अछि।

अइँ संघर्षक हिस्सामे अपन मातृभाषा लेल एकटा राजनेताकेँ तौर पर कर्पूरी ठाकुर द्वारा उठाओल गेल डेगकेँ हमरा लोकनि कहियो विस्मृत नइँ कऽ सकैत छी।

मैथिलीकेँ भारतीय संविधानमे जगह भेटै ताहिलेल मजबूत तर्क आओर प्रमाणक संग ओ केन्द्र सरकारकेँ पत्र लिखलनि। जकरा हू-ब-हू राखि रहल छी।


केन्द्रीय सरकार पत्र संख्या 3/ आरि -1014/78 का -8 कैंप                                                         दिनांक 22.12.1977

                    विषय:- भारतीय संविधान की 8 वीं अनुसूची में मैथिली भाषा का सम्मिलित किया जाना।

1. मैथिली बिहार राज्य की बहुत बड़ी जनसंख्या की अभिव्यक्ति का माध्यम रही है और इसका अध्ययन, अध्यापन कलकत्ता विश्वविद्यालय, त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल एवं बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में होता है। बिहार सरकार ने इसे लोक सेवा आयोग में समुचित स्थान प्रदान किया है, साथ ही लेखन, पठन-पाठन की समुचित व्यवस्था के उद्देश्य से बिहार सरकार की ओर से मैथिली अकादमी में इसे सम्मानपूर्ण स्थान प्रदान किया है और कई बार इसके लेखकों को पुरस्कृत भी किया है।

2. फिर भी उन सारी सुविधाओं से वंचित है जो अन्य मान्यता प्राप्त भाषाओं को उपलब्ध है यथा प्रारंभिक शिक्षा का माध्यम, केन्द्र सरकार से प्राप्त होने वाले अनुदान, विभिन्न भाषाओं से अनुवाद की सुविधाएँ, विभिन्न क्षेत्रों में इसका प्रयोग तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार एवं संवैधानिक मान्यता की गरिमा।

3. मैथिली भाषा की व्यापकता और लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए संविधान की अष्टम अनुसूची में इसे सम्मिलित करने का पर्याप्त औचित्य है। इस संबंध में निम्नलिखित बातें ज्ञातव्य हैं:-

(क) मैथिली एक जीवंत भाषा है। इसका प्रयोग मौखिक और लिखित दोनों में होता है। वर्त्तमान और भविष्य में इसके विकास की और भी संभावनाएँ हैं।

(ख) अपने विलक्षण प्रयोग, स्वतंत्र व्याकरण और लिपि एवं अन्य भाषा वैज्ञानिक दृष्टियों से मैथिली एक पृथक स्वरूप रखने वाली भाषा है। भाषा विज्ञान के सभी अंगों ध्वनि, पद, वाक्य, अर्थ आदि की दृष्टि से मैथिली एक पूर्ण विकसित भाषा है। साहित्य संपादन में यह देश की समकक्ष भाषाओं में एक है।

(ग) मैथिली भाषा का प्रयोग बिहार के अतिरिक्त उत्तर-प्रदेश, बंगाल, मध्यप्रदेश एवं गुजरात के कुछ क्षेत्रों में तथा नेपाल के अधिकांश भागों में होता है। नेपाल के करीब तीस लाख नागरिक मैथिली भाषी है। यहाँ द्वितीय भाषा के रूप में मैथिली सुप्रतिष्ठित है। मैथिली भाषा-भाषियों की संख्या अपने देश में ही दो करोड़ से अधिक है तथा नेपाल में तीस लाख है। अत: जनसंख्या की दृष्टि से मैथिली का विशिष्ट महत्त्व है। ज्ञातव्य हो कि सिंधी भाषा-भाषियों की संख्या 14 लाख मात्र है और वह संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित है।

(घ) मैथिली में सांस्कृतिक चेतना की अभिव्यक्ति की पूर्ण क्षमता विद्यमान हैं। बिहार आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से किसी-न-किसी रूप में मैथिली का कार्यक्रम प्रसारित होता है। इस भाषा के पत्र-पत्रिकाओं की संख्या पूर्व से और भी बढ़ती जा रही है। विश्वविद्यालय स्तर पर एम.ए, पी-एच.डी, डी.लिट् आदि उपाधियाँ 50 वर्षों से प्राप्त होती रही है।

अस्तु, भारत सरकार से मेरा आग्रह व निवेदन होगा कि मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में अविलंब सम्मिलित किया जाना चाहिए जिससे बिहार की इस प्रमुख एवं समर्थ भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण मान्यता मिले और इसके सर्वांगीण विकास के लिए सभी राजकीय सुविधाएँ प्राप्त हो सके।

भवदीय
कर्पूरी ठाकुर
मुख्यमंत्री, बिहार


wikipedia: Stamp of india

मिथिला विश्वविद्यालय यानी एखन जे ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा अछि तकर निर्माणक प्रक्रिया अत्यन्त रोचक अछि। 23 मार्च 1971 केँ बिहार विधान परिषदमे कर्पूरी ठाकुर मुख्यमंत्री पद पर रहैत अपन एकटा भाषणमे अइँ प्रसंग पर विस्तृत अभिव्यक्ति व्यक्त कयने छथि जे बिहार विधान परिषदक पत्रिका परिषद साक्ष्यक विशेष अंक ‘जन से जननायक कर्पूरी ठाकुर’मे संगृहित अछि। ओ कहै छथि:- महोदय, माननीय सदस्य लोकनि कहैत छथि जे जखन कर्पूरी ठाकुर विपक्षमे बैसति छथि तॅं खूब जोरसँ मांग रखैत छथि जे मिथिला विश्वविद्यालयक स्थापना हेबाक चाही मुदा जखन सरकारमे अबैत छथि तखन अइँ बातकेँ बिसरि जाइत छथि।

परञ्च बात किछु आओर अछि। बिसरबाक आदति हिनका सभकेँ भऽ सकैए, हमरा एहेन आदति नइँ रहल अछि, नइँ अछि आ नइँ हैत। हम अइँ जगहसॅं हटि जाएब पसीन करब मुदा एहेन आदति लगाएब किन्नहुँ नइँ। मिथिला विश्वविद्यालयक विषयमे हम नइँ केवल सोचबेटा कएने छी बरू अइँ दिशामे कारवाई सेहो कएलहुँ अछि। हम देखलहुँ जे पिछला दू बरिखसॅं लगातार दरभंगामे पंडित समाज ई मांग करैत आबि रहल अछि जे एहिठाम संस्कृत विश्वविद्यालय फराक रूपमे अछिए, एकरा संग नव विश्वविद्यालय खोलबाक कोन बेगरता? अइँ संबंधमे राज्यपाल लग कतेको पत्र भेजल गेल, कतेको तार भेजल गेल। ई शिष्टमंडल लोकनि राज्यपाल ओ बिहार सरकारक शिक्षा विभागक अधिकारीसॅं भेंट कएलनि। हुनका पत्र ओ तार पठेलनि। अखबारक कॉलम रंगि देल गेल जे संस्कृत विश्वविद्यालयक संग मिथिला विश्वविद्यालयक स्थापना नइँ हेबाक चाही।

फेर ओ कहैत छथि जे मिथिला विश्वविद्यालयकेँ विषयमे जॅं सभसँ पहिने केओ कोनो तरहक कारवाई कएलनि तॅ ओ 1967 मे गठित व संविद सरकार अछि अर्थात हम अइँ लेल पहिल बेर डेग बढेलहुँ। हम विश्वविद्यालय अनुदान आयोगकेँ खाली चिट्ठीएटा नइँ लिखलहुँ, दू बेर दिल्ली जाकऽ भेंट ओ अइँ संदर्भमे गप्प सेहो कएलहुँ। ओहिठाम यूजीसीक अध्यक्ष श्री कोठारी सॅं गप्प भेल संगहि हम दरभंगा राजक संचालकसॅं सेहो गप्प कएनि। ओ लोकनि आश्वासन देलनि जे संस्कृत विश्वविद्यालयक संग अहाँ मिथिला विश्वविद्यालयक स्थापनि करऽ चाहैत छी तँ करू मुदा शर्त रहत जे दरभंगा महाराजाधिराजक नाम जे चलैत आबि रहल अछि से चलिते रहत। हमहूँ हिनका लोकनिक प्रस्तावसॅं सहमत रही। एकर बाद फेर यूजीसीसॅं बात कएलहुँ। ओहिठाम सॅं एकटा विशेष टीम जाँच लेल दरभंगा आएल……।

तेँ ई कहब जे जखन हम विपक्षमे रहैत छी तखन अइँ तरहक मांग करैत छी आओर जखन सरकारक सदस्य बनि गेलहुँ तँ काज नइँ करैत छी, ई सरासर गलत अछि। हमर प्रयास जारी अछि, बिनु किनको कहले-सुनले जारी अछि आ आगुओ जारी रहत। बादमे 1972 ई. मे आबिकऽ अइँ विश्वविद्यालयक स्थापना भेल।

मिथिला गाम-देहातक क्षेत्र अछि। महात्मा गाँधी जीक ग्राम स्वराजक सपनाकेँ धरातल पर उतारब कर्पूरीक प्रमुख उद्देश्यमे सॅं एक छल। हिनके शासनकालमे 1978 ई. मे जखन ग्राम-पंचायतक चुनाव कराएल गेल तखन कतेको दशकसॅं गामक चेतना पर कुंडी मारिकऽ बैसल लोक सभक आसन छिना गेल। वंचित वर्गक बहुतो लोक पंचायत चुनावक मादे नेतृत्वकर्ताक भूमिकामे आबि गेल। बिहारमे आइ दबल-पिछड़ल लोककेँ शासन सत्तामे जे भागीदारी भेटल अछि, ओकर भूमिका कर्पूरी ठाकुर द्वारा लिखल गेल अछि।

बिहारक राजनीतिमे कर्पूरी ठाकुर पर दल बदल करब आ दबावक राजनीति करबाक खूब आरोप लगाओल जाइत छल। ओ सरकार बनेबाक हेतु नरम भऽकऽ कोनो दलसॅं गठबंधन कऽ लैत छलथि मुदा जॅ मनमोताबिक जनताक हितमे काज नइँ होइत छल तँ गठबंधन तोड़ि सरकारसॅं बाहर भऽ जाइत छलथि। यैह वजह छल जे हुनक दोस्त ओ दुश्मन दूनूकेँ हिनक राजनीतिक फैसलाक अनिश्चिततासॅं डर बनल रहैत छल।

फाटल कुर्ता, टूटल चप्पल एवं उजरल-पुजरल केश ओ आँखिक ऊपर एकटा नमहर फ्रेमक चश्मा कतौ दूरेसॅं चिन्हा सकैत रहथि कर्पूरी ठाकुर। मुख्यमंत्री रहितो ई फक्कड़ सन अपन जीवन जीलाह। कर्पूरी ठाकुर वास्तवमे समाजवादी राजनीतिकेँ बड्ड पैघ नेता रहथि, हुनक नाम पर माल्यार्पण करएबला हुनक सादगी आओर ईमानदारीसॅं भरल बाट पर चलबाक साहस कतई नइँ कऽ पाओत।

17 फरवरी 1988 ई. केँ अचानक हृदयाघातसॅं गुदरीक ई लाल सदाक लेल अइँ लोकसॅं विदा भऽ गेलथि। सभसँ पहिने हिनक पैतृक गाम पितौझिया केँ सन 1988 ई. मे कर्पूरीग्राम नाम देल गेल। हिनक नाम पर बक्सरमे जननायक कर्पूरी ठाकुर विधि महाविद्यालय, मधेपुरामे जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज आ दरभंगा आओर समस्तीपुरमे अस्पतालक स्थापना कएल गेल। भारत सरकारद्वारा हिनक नामसँ डाक टिकट जारी भेल। दरभंगा-अमृतसरक लेल जननायक एक्सप्रेस ट्रेन चालू कएल गेल। हिनका नाम पर संग्रहालय आओर हॉल्ट सेहो अछि। हिनक सादगी हमरा लोकनिक लेल एकटा प्रेरणा अछि। देशक संगहि मिथिलाक शोषित-पीड़ित-वंचित, अनन्नुत एवं आमजनक हृदयमे ओ सदिखन विराजमान रहताह।

काली शंकर झा

लेखक ।

साभार : कर्पूरी ठाकुरक बारेमे ई लेख काली शंकर झाके फेसबुक वालसँ सादरपूर्वक लेल गेल अछि।

लेखके सन्दर्भमे:
लेखक अपन फोटो राखबाक लेल अनुमति नइँ देलासँ हुनक नाम मात्रसँ लेख सम्प्रेष्ण कएल गेल अछि। ई लेख बहुत रासँ जानकारीके समेटने अछि जे पढ़िक सार्थक बुझाएल हेत। मिथिला मैथिलीक एकटा बहुत पैघ आ दूरदर्शी सपूत ओ जननेता कर्पूरी ठाकुरक बारेमे ई लेख काली शंकर झा सरके फेसबुक वालसँ सादरपूर्वक लेल गेल अछि। झा सरकेँ व्यक्तिगत रूपेँ हम नइँ चिन्हैत-जनैत छियनि आ तेँ हुनकर फोटो सेहो एहि लेख सङ्गहि पोस्ट करबाक मोन छल मुदा से सम्भव नइँ भऽ सकल, सर मना कऽ देलथि ई कहि जे – ‘उपयोग हेतु अहांँ स्वतंत्र छी। अपने जाहि रुपमे उपयोग कर चाही , कऽ सकै छी। फोटो नइँ लगावि तँ नीके बात। सोसल मिडिया पर हमर कतौ फोटो नइँ लागल अछि। शेष शुभ।’

लेख पढ़ि बहुत आश्चर्य लागल जे, मिथिला मैथिलीक बारेमे समाजमे भ्रम पसारएबला किछु लोकसभक मानसिकताकेँ अज्ञानता वा अर्धज्ञानताक कारण दुषित बनाओल गेल छै आ हिनका सभक अर्धज्ञानतामे भस्मासुरीयन भूतके आरोपीत कऽ मिथिला मैथिलीक पैघ भुगोलकेँ क्षति करबाक चेष्टा कएल जा रहल छै, ओहि तीन-चारिटा भाषा-भाषीसभद्वारा जेकर भाषा-साहित्यके स्थान एवं कद मैथिली भाषा, साहित्य, एकर व्याकरण एवं शब्दकोषसभक सामने बहुत लघु छै, छोट छै।
( कैलाश कुमार ठाकुर )

कैलाश कुमार ठाकुर

कैलाश कुमार ठाकुर [Kailash Kumar Thakur] जी आइ लभ मिथिला डट कमके प्रधान सम्पादक छथि। म्यूजिक मैथिली एपके संस्थापक सदस्य सेहो छथि। Kailash Kumar Thakur is Chef Editor of ilovemithila.com email - [email protected], +9779827625706

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