मुख्य विजेता बनबा जोगर भलहि ने भेटलह ‘भोट’
खुआक’ जगतक मूह मिठौलह मिथिलाकेर अमोट

देखि-सूनिक’ हमरोसभकेँ भेटल हौ ‘सन्तोष’ परम
अपन हुनरसँ देशक नाँ चमकेबासँ बढ़ि कोन धरम!

कहू अहीँसभ संसारहिमे हएत एहनसन वीर के?
मड़ुआ जे कि कुअन्न कहाबै तकरो बनबै खीर जे

अपने ‘बगिया’ लण्डन गमकल नाम नेवारी ‘योमरी’
सगर देशकेँ जोड़ि जगतमे परसैक वर्णन की करी!

काजो ओहने अनमन तोहर दिव्य सुदर्शन रूपसन
बजैत देखलियह माइक छाती होइत छलैए सूपसन

की जँचैत छह मुस्किआइत छवि नेपाली शिरपागमे
जीहक बाटे गेलह तोँ दिलदिल, बैसि गेलह अनुरागमे

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© लेखक : धीरेन्द्र प्रेमर्षि

धीरेन्द्र प्रेमर्षि, मैथिलीक सशक्त साहित्यकार एवं संगीतज्ञ रूपमे स्थापित छथि। गीत-कविता-गजलक अतिरिक्त कथा, लेख-निबन्ध, अनुवाद आदि विधाक माध्यमे मैथिली आ नेपाली दूनु भाषामे सेवा प्रदान करैत आएल छथि। रेडियो कान्तिपुरसँ १९ वर्षसँ प्रसारित होइत आएल रेडियो कार्यक्रम ‘हेल्लो मिथिला’ सँ समग्र मिथिलाक सामाजिक-सांस्कृतिक सुदृढ़ीकरणपर योगदान दैत आएल छथि। विभिन्न माध्यमे राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तरपर मैथिली भाषा, कला, संस्कृतिकेँ उँचाइ देबामे सफल प्रेमर्षि बहुतो नवतुरियाक पथप्रदर्शक एवं आदर्शक रूपमे सेहो सुपरिचित छथि। वर्तमानमे नेपाल सङ्गीत तथा नाट्य प्रज्ञा-प्रतिष्ठानक परिषद सदस्य रहल प्राज्ञ प्रेमर्षि प्रतिष्ठानक परम्परागत तथा शास्त्रीय सङ्गीत विभागक प्रमुख छथि।

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