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मैथिली कविता: हम युद्ध नइँ जित सकल छी

कम चेतना दऽ बेसी ललिपप चटेलही...

कवि नन्दलाल आचार्यके मैथिली कविता प्रस्तुत अछि। ई कविता मैथिलीमे अनुवाद कएल छल। अइमे Voice सेहो देल अछि।

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१.हम युद्ध नइँ जित सकल छी : मैथिली कविता

शान्ति आ सुव्यवस्थाकेँ अस्त्र बनेलिही
केलही, बहुत केलही
सभक मनमनमे ढोल बजेलिही
जीवनमे बेर बेर भूकम्प आनलिही
सड़क गरमेलही, निन्द उड़ेलही
सपना बाँटलिही, अस्थिर भविष्य देलही
कम चेतना दऽ बेसी ललिपप चटेलही
तन, मन, धन हरि लेलही,
कोनाकोनटासँ समर्थन पएलिही,
मुर्दा शान्तिक रट लगेलिही
आ, एखन भोटियाँपर सुतेलही ।

–हम तन्द्रासँ संसारमे एलियै त
ओ कतौ नइँ छल,
तखन हम खूब ताकलौँ
अखनो तक ताकिते छी ।
हँ, अहाँ लग नुकायल कि !
देख दिय, ताकि दिय, पत्ता लगा दिय
कहीँ दक्षिणके बाघ चोराकऽ लगेल कि !
कहीँ उत्तरके भालु आबिकऽ लगेल कि !
शरमसँ कतौ चलि गेल कि !
हँ, ओकरा आबऽ सँ पहिने
हमरा, हम भकऽ रहबाक चाही
हमरा, हम हएबाक चाही
ई जीवनयुद्धके मैदानमे
आदिमकालसँ कसरत करैत छी ।
मुदा, आइयोधरि
हम, हम नइँ भऽ सकल छी
हम युद्ध नइँ जित सकल छी ।

२.हम युद्ध नइँ जित सकल छी : मैथिली कविता

अहाँ कहि सकैत हेबै–
दुनियाँ बुझि सकैत हेतै–
स्मृतिमे रहऽ बलासभ
जीवनयुद्ध जितऽ बला खेलाड़ी छथि
दुनियाँकेँ बदलबाक काजमे
जीवन समर्पण कऽ कए
अपनाकेँ स्मृतिक सूचिमे रखलाह
आ, जनमनमे विराजमान भेलाह।
– नइँ, भ्रम, पैघ भ्रम
फेर एकबेर भ्रमक आँधी आनल गेल अछि
फेर एकबेर शब्दफसिल लगायल गेल अछि ।
किये आइधरि
मनुख्ख, मनुख्ख नइँ बनि सकल,
हम, हम नइँ बनि सकल छी
हम युद्ध नइँ जित सकल छी ।

३. हम युद्ध नइँ जित सकल छी : मैथिली कविता

मैथिली कविता

भीमसेन थापासभ जितने छथि त ?
अब्राहम लिङ्कनसभ दासमोचन कएने छथि त ?
महात्मा गान्धीसभ मुसकान बाँटने छथि त ?
नइँ, वर्तमानक एलबममे नइँ देखल जाइत अछि ।
किएक कि
रणजङ्ग पाँडेसभ, नाथुराम गोडसेसभ
एखनोधरि हँसि रहल छथि,
एखनोधरि एतऽ कतौँ नाँचि रहल छथि,
जोन विल्किस बुथसभ
एखनोधरि बन्दुक सोझ कएने छथि ।
किएक कि
भानुभक्तसभ, लक्ष्मीप्रसादसभ
नान्यदेवसभ, विद्यापतिसभ
सेक्सपियरसभ, होमरसभ
एखनोधरि विभक्त भऽक स्मृतिमे जिबिते छथि ।
किएक कि

यज्ञबहादुर थापासभ, दुर्गानन्द झासभ
शुक्रराज शास्त्रीसभ, दिलिप चौधरीसभ
एतने मात्र नइँ,
लखन थापासभ, रमेश महतोसभ
विभक्त भऽकऽ स्मृतिमे जिबिते छथि ।
धिक्कार अछि,
हमरा, अहाँकेँ आ ओकरा !
‘विद्यापती गीत’ , ‘बालुन’, ‘लाखे’ नाँचक ठामपर
हम पाँडे, गोडसे, बुथ नाँचसभ
देखऽ मे मगन आ मस्त भऽ रहल छी
विभक्त रेखा खिँचिकऽ
अपनाकेँ विजेता कहैत छी ।
तहि हम, हम नइँ भऽ सकल छी,
हम युद्ध नइँ जित सकल छी ।

४.हम युद्ध नइँ जित सकल छी : मैथिली कविता

जितलै आ जित रहल अछि–
भित्ताक पेण्डुलमो,
प्राणदाता सूर्यक किरणो,
स्मृतियोग्य नरनारीक करमो,
मैथिली साहित्य परिषदो,
सगरमाथा साहित्य परिषदो ।
किएक कि
एखनोधरि देखि रहल छी,
हमर जयत गौडसभ ,
विद्यापतिय सांस्कारिक गीत गाबि रहल छथि
हमर धीरेन्द्र प्रेमर्षिसभ ,
जनताक धुकधुकीकेँ सम्बोधन कऽ रहल छथि।
हमर नारायण गोपालसभ ,
‘आँखा छोपी नरोऊ’ गाबि रहल छथि ।
हमर प्रिय कृष्ण सेन ‘इच्छुक’सभ ,
जनइच्छाकेँ कविता गढ़ि रहल छथि ।

एहन गौडसभ, एहन प्रेमर्षिसभ
एहन गोपालसभ, एहन इच्छुकसभ
हमरासभक पाखण्ड आ व्यक्तिमोहके कारण
आँगुरपर गनि सकऽ वला मात्र भऽकऽ रहल छथि
आ, तइँयो खबरदारी कऽ रहल छथि ।
धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्राप्तिक लेल कहिकऽ
आइ काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद आ मात्सर्यसङ्गे
सम्बन्ध राखैत छी ।
ओही समय भेल एक विष्फोटने
आइ हमरा हरा रहल अछि
अहाँकेँ पराजयक विष पिआ रहल अछि,
ओकरा असफलताक सुआद चिखा रहल अछि !
अतः हम, हम नइँ भऽ सकल छी,
हम युद्ध नइँ जित सकल छी ।

कवि:

 नन्दलाल आचार्य
जहडा–लालसिसुवा, बेलका नगरपालिका, उदयपुर 

( हाल : श्री जनता मा.वि. गोलबजार – ४ सिरहा )
१२म अन्तर्रााष्ट्रय मैथिली सम्मेलन मुम्बईद्वारा २०७२ सालमे ’मिथिलारत्न’ विभूषणद्वारा विभूषित सगरमाथा साहित्य परिषद्, नेपालक केन्द्रिय सचिव मातृभाषा नेपाली रहितो मैथिली साहित्य-सृजनमे निरन्तर शक्रिय कलमकर्मीक रूपमे परिचित छथि।

(ई कविता साहित्यिक विभूतिमध्यके एक, कविकोकिल महाकवि विद्यापति (१३६०–१४४८ र्ई.सं) स्मृति पर्वक अवसरमे मैथिली साहित्य परिषदसँ (२०६८.०७.२१ गते, दिनक ११ बजे, मैथिली भवनमे आयोजित हुअवला मैथिली साहित्यिक गोष्ठीमे वाचनक लेल कवि आचार्य प्रस्तुत कएने रहथि। एहि कविताके मैथिली अनुवादमे सहयोग आयुसी झा आ कुमार बब्लु कएने छथि।)

Gajendra Gajur

Gajendra Gajur is Editor of Ilovemithila.com . Maithili Language Activist. He is Also Known for Poetry. गजेन्द्र गजुर जी एहि वेबसाइटक सम्पादक छथि। कवि सेहो छथि। Email- [email protected]

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