Poem

मैथिली कविता ‘प्रेम’ : अयोध्यानाथ चौधरी

प्रेम छै रवि-रश्मिक पहिल उपहार
पाँज भरि समेटि ली मीत।।

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प्रेम छै सिहकैत सुरभित समीर
पोर-पोरमे भरि ली मीत।।

प्रेम छै श्वेत सिङ्गरहारक पथार
आस्ते-आस्ते बीछि ली मीत।।

प्रेम छै सुकोमल तन्नुक डाढ़ि
सुस्त-सुस्ते दोमि ली मीत।।

प्रेम छै राधा-मीराक अगम आँखि
कने डूबिकऽ देखि ली मीत।।

प्रेम छै मुमताज-महल ताज
कने पैसि कए देखि ली मीत।।

प्रेम छै सान्ध्यकालीन संगीत
कान थापि कए सुनि ली मीत।।

प्रेम छै ज्योत्सना-स्पर्शित लहरि
अबेर धरि निहारैत रही मीत।।

प्रेम छै अविरल अनन्त आख्यान
आब घर घुरि चली मीत।।

कवि (Poet) :

अयोध्यानाथ चौधरी (Ayodhyanth Choudhary)

कवि अयोध्यनाथ चौधरी मैथिली साहित्य आ सङ्गीत क्षेत्रक शीर्षथ हस्ताक्षर छथि। साहित्य क्षेत्रमे योगदान लेल नेपाल विद्यापति पुरस्कारसँ पुरस्कृत छथि।

कैलाश कुमार ठाकुर

कैलाश कुमार ठाकुर [Kailash Kumar Thakur] जी आइ लभ मिथिला डट कमके प्रधान सम्पादक छथि। म्यूजिक मैथिली एपके संस्थापक सदस्य सेहो छथि। Kailash Kumar Thakur is Chef Editor of ilovemithila.com email - [email protected], +9779827625706

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