Poem

रमेश रञ्जनक पाँचटा मैथिली कविता


 

रमेश रञ्जनक अप्रकाशित कविता

पहिल कविता – अन्तर्य

आगुंरक स्पर्श
ठोढ़क कम्पन
हृदयक गुदगुदी
प्रेम/सिर्जनक
आनन्ददायी स्मरण
एखनो अतितक
दुधिया इजोतक स्नान
अह्लादक अछि

पुतरीक नाच
चिड़ैयक गायन
हिलोराक आस
जीवनयात्राक
सुदुर अतीतमे
हेरा गेल बुझाइए

नइँ बिसराएल अछि
बर-कनियाँक खेल
खेलक साक्ष्य
हमर रक्त-मांस-मज्जा
आर्शिवादक
कवज-कुण्डलसँ अच्छादित अछि

रङ्ग ओएह छै
संसारक
आगि-पानि-वृक्ष-नदी
सभक रङ्ग ओएह छै
बइमनमा ज्ञानेन्द्रिय
ने देख सकैत अछि
ने सुनि सकैत अछि
मुदा अनुभूति आ संवेदना
ओहिना जुआन अछि
एखनो

सन्ठीक हाथ
अण्डीक पैर
पोरोपात सन चमड़ी
अरिकोंचसन आंगुर
मांस-मज्जा नइँँ
माटि-भूस्सासँ बनल टाट
रक्तवाहिनीक रक्त
नेबोरस मिश्रणसँ फटैत दुध जकाँ
रसे-रसे पानिमे रुपान्तरणक खीस्सा बचैत अछि
मुदा आवेश आ इच्छा
जहिनाके-तहिना

अवस्थाक कनगीपर
सपनाक रङ्ग
भ’ गेल अछि
सियाह
स्वयंसँ दुर होएबाक वेदना
सपनाकेँ आओर भयाओन बनारहल अछि
असह्य
मुदा मोनमे सप्तरङ्गी रङ्गक लहरि
हिलकोर मारिते अछि

अतीत
आ अतीतक स्मरणक जोंक
चुसैत
लटकल अछि
सगर देहमे
अपन सिर्जन
आ शक्ति कि शक्तिहिनता बिसरबाक प्रयत्न
मुहमे कपडा कोचि क’ संभव नइँ छै
साड़ी की गमछाक खूँट
आँखिक नोर नइँँ सोखि पाबिरहल अछि

(सन्तान सानिध्यसँ वञ्चित वृद्ध आ वृद्धाक हेतु समर्पित)

 दोसर कविता  परिक्षार्थी

हम युद्ध करबाक हेतु
बेर-बेर परिक्षा दैत रहलहँु
परिणाम धरि पहुँचबाक हेतु
स्वातीक बुन्द जकाँ मुह खोलने रहलहुँ
हमर मुह कोनो धर्मकथाक पात्र जकाँ
अचरज मुह नइँँ अछि
हमर मुह गाय जकाँ अछि
बाँस सन अछि
आ सिपी सन अछि
जे जीवन बीता लैत अछि
स्वातीक बुन्दक आसमे

हँ, हम युद्ध करबाक हेतु
परिक्षा दैत रहलहुँहें
मुदा परिणाम शुन्य
बेर-बेर युद्ध क्लासमे फेल करबाक
हीनतावोध हमरा
डरछेरुअका पदबी दैए
जें कि हम बेर-बेर योद्दा बनबाक
दैत छी परिक्षा
त’ उतीणर् नहिए हएब
तकर कोनो तुक नइँ छै
कहियो ने कहियो
हमरो विष्फोट
आ विध्वन्स करबाक
क्षमतापरपर परीक्षकके
विश्वास हेतै
आ ने त’ टेबलेटिंगमे
हम लगाएब कोनो तरकीब
उतीणर् होएबाक

मार्र्ग

आँखिक
नोर
बाउलक
बिर्रो
ललाटसँ चुबैत
रक्त
आवाज उगलैत
आगि
मस्तिष्क हथियारक
बखारी
तखन साटू ठोढ़के लस्सासँ ।

संवेदनाक गोरहा खेतमे
बाउग कएल जाए
घृणा
पटाओल जाए
जहर
उर्वराक रुपमे प्रयोग कएल जाए
विभेद
रखबारी करए
सम्प्रदायिकता
तखन खरिहानमे लगा लिय
टाटी-फराठी

राजनीतिक अर्थ भ’ जाइक
मात्र सत्ता
अर्थ भ’ जाइक
भोग
अर्थ भ’ जाइक
सार्मथ्य
अर्थ भ’ जाइक
सौर्य
अर्थ भ’ जाइक
दर्प
अर्थ भ’ जाइक
विध्वन्स
तखन हटब’ पड़त ठोढ़क लस्सा
गाड़ पड़त खरिहानमे मेह
ढाठल बिलैया तोडि़
निकल’ पड़त सड़कपर

धर्म धूरी

धर्म धुरीक
कक्षक यात्री
नइँ चटलक मौध

गुनधुन यात्रा
यात्रा नइँ
हिलोरा छलै
जाहिमे गण्तब्य नइँ
रोमाञ्चकता छलै

थाहैत अछि
तकैत अछि
फेर फन-फन नचैत अछि
भकुआएल
धर्म धूरीक कक्ष
अफिमक सुनगैत आबा अछि
जाहिमे काँच धर्मभिरु
पाकिक’ निस्सन
धर्म गोला बनैत अछि

धर्म जीवनक चरणामृत नइँ
तेजाबी अग्नि बँटैत अछि
ओ अपना धूरीमे सभके
करबैत अछि तेजाबी स्नान
२०७६।०२।७

तेसर कविता – धूर्तता

चुत्तरपर चाटी मारिक’
ठेकैताके बोकिएबाक कला
बहुत थोड़मे होइत छै

आगू बढ़ैत धापके
छिटकी मारि खसा देबाक
आ अपनाके आगू क’ लेबाक कला
बहूत थोड़मे होइत छै

जकरा वृद्धिक लेल
माटि आ माटिक
उर्वरा नइँ चाही
जकरा लग भोजन ग्रहणक
दोसरक भोजन शोषबाक
वरदानी क्षमता छै
जे बाँसक लग्गीसँ
मेघमे भूर क’ क’
खेतमे बारीस करा सकैए
तकरा की कहबै ?
२०७०।११।२ परबाहा

 चारिम कविता – कनगी

ओ जे कनगीपर छै ठाढ़
भूमध्यक हकदार छै

ओ पएरमे नइँ बन्हने छल पहिया
कोनो ढलकानसँ नइँ ढलकल छल
इच्छासँ
ओकरा कोनो अन्हर
बाढि़
आ कि बिहारि
कोनो भूस्खन
आ कि बिर्रो
नइँ धकेल देने छलै कनगीपर

कोढि़लाक नाव
आ कि केराक थम्हसँ
सागर पार करबाक हेतु
सक्कत नइँ बना सकल डाँर
सपनामे नइँ अएलै चील गाड़ी
मरि गेलै उड़नखटोला देखबाक आश

ओकर जत’ स्थिर होइत छै आँखि
ओ छै सिढ़ी
मुदा सिढ़ीक खाँचमे
छत्र कढ़ने साँपो छै

ओ भूमध्यक हकदारकेँ
कनगी धरिक यात्रा
समयक किताबी अक्षरक मध्यमे
बाउग कएल सङ्घर्ष बीज
इतिहास आ वर्तमान त्रासदीक
सौन्दर्य व्याख्या क’ रहल अछि

२०७६।३।११

पाँचम कविता – गुड़रल आँखि

गुड़रल आँखि
स्मरणक जमिने नइँ
कब्जओने अछि
अस्तित्वक पोर-पोरपर
फहरबैत अछि झण्डा

गुड़रल आँखि
समयक पपनी
परिस्थितिक भौंसँ
पृथक भूखण्ड जकाँ
सम्बन्ध विच्छेद कएने अछि

गुड़रल अँखिसँ
वाध्यताक नाता अछि
ओ सम्बन्धक सहमति
आ विचारक विमति
दर्शनक तत्वचेत
शैद्धान्तिक मूल्य
विवाद-विमर्शक तरलतासँ
गेंठवन्धन नइँ करैत अछि

गुड़रल आँखि
निस्पादन करैए घृणा
प्रक्षेपण करैए आतङ्क
गुड़रल आँखिसँ
हमर नाता अछि
वाध्यताक
हमर नाता अछि
आतङ्कक
२०७६।४।४

©

रमेश रञ्जन

रमेश रञ्जन जी,मैथिली कथा जगतमे प्रसिद्ध नाम अछि।

कृति – सङोर,फूलवा हरण,डोमकछ,मूर्दा 

बासस्थान – औरही गाँउपालिका,धनुषा,

इमेल [email protected]

Gajendra Gajur

गजेन्द्र गजुर जी एहि वेबसाइटक सम्पादक छथि। [email protected]

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