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कुचक्रमे फँसल सनातनी बौद्धिक सम्पदा : राजनाथ मिश्र

भारतीय सनातनी ऋषिलोकनि सत्रहम शताब्दमे आइजैक न्यूटन द्वारा गतिक अपने तीन नियम प्रस्तुत करबासँ बहुत पहिने, ऋषि कणाद एहिके श्लोकबद्ध कऽ प्रस्तुत कऽ देने रहथि।

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ऋषि कणाद यथार्थवादक अग्रणी व्याख्याता ओ ‘वैशेषिक दर्शन’क संस्थापक मानल गेल छथि। ओ श्लोकमे गतिक तीन नियमके गति के नियंत्रित करएवला सिद्धांतक रूपमे प्रस्तुत कएलनि। हुनक मौलिक कार्य, वैशेषिक सूत्र कम सँ कम ६०० ईसा पूर्वक अछि। न्यूटन द्वारा अपन कार्य प्रस्तुत करबासँ प्रायः दू हजार वर्ष पूर्व!
ऋषि कणादक वैशेषिक सूत्रमे प्रतिपादित गतिक तीन नियम वैशेषिक सूत्र सनातनी ऋषि कणादक कतिपय कार्यक संकलन छनि। ई सूत्र सभ गति आओर बलक प्रकृतिमे गहन अन्तर्दृष्टि प्रदान करैछ। एहिमे परमाणु, गुरुत्वाकर्षण आओर भौतिकीक दुनिञा एवं अन्य महत्वपूर्ण अध्ययनक ज्ञान सेहो देल गेल छैक!

*गतिक प्रथम नियम:*
आइजैक न्यूटनक नियम: विश्राम क स्थितिमे कोनहुं वस्तु स्थिरहि रहैत अछि, आ गतिज स्थितिमे कोनहु वस्तु स्थिर गति आ सरल रेखामे गतिशील ताधरि रहैछ जा धरि कि ओहि पर बाह्य बल नइँ लगाओल जाए।
*कणाद सूत्र:* ‘वेगः निमित्तववशेषात् किमानो जायते।’
अर्थ: गतिमे परिवर्तन कोनहुं बलक कारणेँ होइत छै।
स्पष्ट छैक जे ई सूत्र न्यूटन द्वारा अपन पहिल नियममे मात्र प्रतिबिम्बित कएल गेल छैक।
*गतिक द्वितीय नियम:*
आइजैक न्यूटनक नियम: कोनहु वस्तुक त्वरण वस्तुक द्रव्यमान आओर लगाोल गेल बलक मात्रा पर निर्भर करैत छैक।
*कणाद सूत्र:* ‘वेगः निमित्तपेऺात् किमानो जायते नियतादिक क्रियाप्रबन्धहेतु।’
अर्थ: प्रभावित बल बलक दिशामे गतिमे आनुपातिक परिवर्तनक कारण बनि सकै छै।
एना, ई स्पष्ट रूपेँ एहि सिद्धान्तके प्रस्तुत करैत अछि जे न्यूटनक गतिक दोसर नियम द्वारा परिभाषित कएल गेल छैक। ई सूत्र बल आओर गतिक बीच सम्बन्ध स्थापित करैत अछि। ई बिन्दु एहि तथ्य पर जोर देैत छै जे कोनहुं वस्तुक त्वरण लगाोल गेल बलक सोझासोझी आनुपातिक भेल करैछ।
*गतिक तृतीय नियम:*
आइजैक न्यूटनक नियम: जखन कखनहुं एक वस्तु दोसर वस्तु पर बल लगबैत छै तँ दोसर वस्तु पहिल पर बराबर ओ विपरीत बल लगबैत छैक।
*कणाद सूत्र:* ‘वेगः संयोगववशेषववधीर।’
अर्थ: कोनहुं गति बलक क्रिया ओ प्रतिक्रियाक योग अछि।
एहि सूत्रक गाम्भीर्य न्यूटनक तेसर नियममे उत्थर रूपेँ परिलक्षित होइत छैक! ई प्रदर्शित करैछ जे प्रत्येक गति विरोधी ताकति क योग अछि। एहि प्रकारेँ प्रत्येक क्रिया एक समान ओ विपरीत प्रतिक्रियाक कारण बनैत छै जे वस्तुक गतिके प्रभावित कएल करैत छै।
अहीं कहू की आइजैक न्यूटनक प्रसिद्धि एक ‘कट पेस्ट थ्योरी’क मिथ्या पर आधिरित नहि अछि?

५०० वर्षसँ अधिक कालसँ, पश्चिमी जगत गतिक तीन नियमक श्रेय आइजैक न्यूटनके दैत आएल अछि। आ एकरा लऽ कऽ हुनका विलायतक महारानी द्वारा नाइटहुडक उपाधिसँ सम्मानित सेहो कएल गेल रहथि! मुदा एना लगैत छै जे न्यूटन वास्तवमे ऋषि कणादक शब्दसः अनुवाद मात्र कएने रहथि। की ई तथ्य हुनका एक ‘शैक्षणिक मिथ्या’ नहि बनबैत अछि? उत्तर निश्चित रूपमे स्वीकारात्मक अछि।

अन्यथा ऋषि कणादक सिद्धान्त न्यूटनक गतिक नियमक संग एतेक साम्य कोना होइत? प्राचीन ऋषि भौतिक संसार ओ प्रकृतिक शक्तिक मध्य जटिल सम्बन्ध बुझमे पूर्ण सक्षम रहथि। सत पूछी तँ हमरा, एहन लगैत अछि जे चाहे तँ आइजक स्वयं अपन उपलब्धिक प्रसंगमे झूठ बजलाह वा पश्चिमी जगत हुनका दुनिञाके छल ओ धोखा देबालए एक कठपुतलीक रूपमे प्रयोग कएलक। ऋषि कणादक सिद्धान्त न्यूटोनियन भौतिकीसँ कतेको शताब्द पहिलुक थीक।

प्रश्न ई उठैत छैक जे की भारतीय प्रतिभाकेँ हुनक उचित श्रेय देल जाइत छनि? उत्तर अछि ‘किमपि नहि’ ! स्वयं भारतके अखनहु अपन महिमाके पूर्ण रूपसँ स्वीकार करब बाकी छैक।
ऋषि कणादक वैशेषिक सूत्र सनातनी भारतक ज्ञान ओ बौद्धिक कौशलक गाम्भीर्यक ज्वलन्त प्रमाण अछि। भारतक कालजयी बुद्धिमत्ता जखन तखन चुराओल गेल आ ई चोरि तहिया कएल गेल जहिया ओ अपन इतिहासक सभसँ अधिख अशक्तावस्थामे मे रहए! ऋषि कणादक अग्रणी कार्यके स्वीकार कऽ कऽ, भारत अपन गहन वैज्ञानिक दर्शनक धरोहरक अह्लदपूर्ण आमोद मनएबाक चाही।

मुदा एतए तँ सत्तालोलुप राजनेतालोकनि संस्कृतमे लिखल सभ पोथीके के कहय, ब्राह्मण आ सनातनक विनाश करबालेल उद्यत भेल अछि।

■ लेखक : राजनाथ मिश्र
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कैलाश कुमार ठाकुर

कैलाश कुमार ठाकुर [Kailash Kumar Thakur] जी आइ लभ मिथिला डट कमके प्रधान सम्पादक छथि। म्यूजिक मैथिली एपके संस्थापक सदस्य सेहो छथि। Kailash Kumar Thakur is Chef Editor of ilovemithila.com email - [email protected], +9779827625706

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