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कलाकार B N Patel संग बातचीत !

बैद्यनाथ राय [BN Patel ] मिथिला-मैथिलीक अभिनयकला जगतमे नव नाम नइँ अछि। मिथिला-मधेशमे हरेक जगह हिनक अभिनयके प्रशंसक ओ फैनसब छथि, जे हिनका चेहरासँ, हिनकर आवाजसँ, हिनकर सोहनगर अभिनयसँ चिन्हति-जनैत छथि। एखन धरि बहुत रास नाटक, रेडियो नाटक, टेलिभिजन सिरियल, सिनेमासबमे अपन प्रभावशाली अभिनयसँ श्रोता एवं दर्शक सभक मन-मस्तिष्कमे अपन जगह छपने छथि। युट्युब पर सेहो ई बेस लोकप्रिय छथि।

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मुदा तइयो बहुत लोक एहनो छथि जे अपन मातृभूमी मिथिलाक अभिनेतासभक अभिनय यात्राक बारेमे नइँ जनै छथि।

वैद्यनाथ पटेल जीक अन्तरवार्ता प्रस्तुत कऽ रहल छी। हम सब पाँच मीत्रसभ ई वेवसाइट पर मिथिला-मैथिलीसँ सम्बन्धित लेख एवं साहित्यकारसभक साहित्यिक रचना सब पोस्ट करैत रहैत छी, जेकरा जेना समय भेटैछ तहिना। हम सब व्यवसायिक रूपेँ नइँ लागल छी। हमरासभ लग आधारभूत चीजसब उपलब्ध नइँ छै, तइयो जे-जेना हम सब कऽ पाबि रहल छी, करै छी।

प्रस्तुत अछि अभिनेता वैद्यनाथ पटेल जीसँ सम्पादक कैलाश ठाकुरद्वारा लेल गेल अन्तरवार्ता –
प्रश्न (१). स्वागत अछि वैद्यनाथ सर आइ लव मिथिला डट कम पर। अपनेकेँ बहुत श्रोता दर्शक सब चिन्हति-जनैत छथि, मुदा तइयो किछु स्वयं अपने बारेमे बताएल जाउ !

उत्तर:- धन्यवाद ! हमर नाम बैद्यनाथ राय भेल, बहुत लोक बी.एन. पटेलके नामसँ सेहो चिन्हैत-जनैत छथि। घर हमर भेल जनकपुरधाम वार्ड नम्बर १४ मुजेलिया। पढ़ाई-लिखाई आ अध्ययनके बात करी तऽ हम अंग्रेजी विषयमे त्रिभुवन विश्वविद्यालय, (नेपाल)सँ एम.ए. घरिके अध्ययन कएने छी, आ अभिनय क्षेत्रमे लागल छी, एहि अभिनयसँ अपन घर-परिवार चला रहल छी।

प्रश्न: मैथिलीमे व्यवसायिक रूपेँ नाटक, सिनेमा, टेली सिरियलके विकास एखनो धरि नै भऽ सकल छै, तइयो अपने अभिनय क्षेत्रमे कोना चलि अएलौँ सर ?

उत्तर:- अभिनय तरफ जे हइ से हम लगली २०५२ सालमे। ओना हमरा गावमे एकटा परिपाटी छलै पहिने, जे प्रत्येक साल एकटा नाटक होइ छलै, हिन्दी नाटक करै छलीय युवा सब मिलकेऽ। आ हमरा गाममे छै एकटा लाइब्रेरी, बहुत पूरान लाइब्रेरी छै, श्री राधाकृष्ण सार्वजनिक पुस्तकालय, ओहि पुस्तकालय द्वारा प्रत्येक साल नाटकके आयोजन होइ छलै। तऽ ओइमे हम पहिल नाटक २०५२ सालमे कएने छी। और, तेकर बाद सब साल करऽ लगलीयै आ २०५५ सालमे ऊ जे हिन्दीवला परिपाटी छलै तेकरा हटाके मैथिलीवला परिपाटी, मैथिली नाटक शुरूआत कएलियै। आ तकर बाद २०६१ सालमे अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली नाटक भेल रहै, तऽ ओइमे जे हइ सेहो पार्टिसिपेट कएने रही, और ओहि नाटकमे २०६१ सालमे रीना यादव हमरा सबके टीममे सामील भेलथि, चुकी ओ हमरे गामके छै, तऽ हम सब जे हइ से आग्रह कऽकऽ लाइल रहियइ, आ ओ नाटक करबएने रहियइ। रीना यादवके ओ पहिल नाटक रहनि।

प्रश्न : अपनेके घर-परिवारसँ केहन सपोर्ट वा विरोधक सामना करऽ पड़ैए, अभिनयके लऽकऽ ?

उत्तर:- घर-परिवारसँ सहयोगे भेटल हमरा, विरोध वा असहयोग तऽ नइँ कहल जा सकैछ। हँ लेकिन शुरूमे किछु पारिवारिक तनाव रहै, जे एतेक पढ़ि-लीखि कऽ एहि क्षेत्रमे कएला जाइ छेऽ। मुदा तइयो काज करैत गेली तऽ सबगोटे सपोर्टे – सहयोगे करे लागल। आब कनि निक अवस्था बुझाइ छै, घर-परिवार सेहो आब एहि क्षेत्रसँ निके जकाँ चलि रहल छै। बाल-बच्चासबके पढ़ाई-लिखाई सेहो एहि क्षेत्रमे लागी कऽ करबा रहल छी, सब किछु निके जकाँ चलि रहल छै।

प्रश्न : मैथिली व्यवसायिक नाटक, सिनेमा, टेलीविजन सीरियल सभक विकास कएला नइँ भऽ सकलै ? एखनो की बाधा-अवरोध छै ?

उत्तर:- यौ, सबसँ बड़का बात ई छै की, मैथिली मिथिलामे एकजुटताके कमी हइ, एक-दोसरके निक कामकेँ प्रशंसा करब तेकर कमी हइ, एक-दोसरकेँ आवश्यक सहयोग करब तइके कमी हइ। जाति-जातिमे जे हइ से भाषा बँटल हइ, क्षेत्र-क्षेत्रमे ई भाषा बँटल हइ। ओना कहै छै जे भाषा पाँचे कोष पर बदलै छै, लेकिन तइयो ऊ सब एकजुटता देखबै छै। जेना भोजपुरीए के लऽ लीय, भोजपुरी बादमे अबितोमे हमरा सभक तुलनामे व्यवसायिक रूपेँ बहुत आगा भऽ गेलैए, ऊ एकजुटताके कमी छै की, जे बाहर दोसर भाषासबमे देखल जाइ छै, से अइठाम नइँ देखल जाइ छै। अइयऽ छोटका-बड़का, तऽ अगिला-पछिला, तऽ कथी कहू … धनीक-गरीब … सब बहुत चीजसब छै, जइ लऽ केऽ एक-दोसर पर भरोसा नइँ करै हइ, एक-दोसरके सम्मान नइँ करै छै, आ तेँ व्यवसायिक रूपेँ ई जे हइ से पाछा पड़ल हइ।

प्रश्न : अपनेक अभिनय वला भिडियोसब युटयूब पर सेहो बहुत लोकप्रिय होइत छै, की कारण छै तेकर ?

उत्तर:- ओना, हम पुरा एकटा लोकल हिसाबसे अपना गाममे, अपना टोलमे, अपना परोसमे पारिवारिक-सामाजीक चीजसब अध्ययन कऽकऽ आ तब ओकरा बनबै छी। तइ लऽकेऽ भऽ सकै छै लोकप्रिय भऽ जाइ छै।

प्रश्न : मैथिली भाषाक विकासके लेल समाज आ सरकार दुनूके की भुमिका होएबाक चाही ?

उत्तर:- मैथिली भाषाके विकासके लेल वास्तवमे सरकार आ समाज दूनूके जे छै से अगाड़ी आबऽ परतै। जा धरि सरकार लगानी नइँ करतइ, जा धरि ई समाज अपन भाषा प्रती जागरूक नइँ हेतै, एक-दोसरके प्रेम नइँ करतै, एक-दोसरके सहयोग नइँ करतै ता धरि ई भाषा अहिना लड़बड़ाइत रहतै। ई समस्या मैथिली भाषाके मात्रे नेपाले टा मे नइँ छै। ओहू पार जाइब, मैथिली भाषी तऽ नेपालसँ बेसी जे हइ से भारतमे छै, बहुत बेसी। लेकिन ओहू ठाम ईहे समस्या छै। ओहू ठाम, एक-दोसर प्रती जे हइ से, एक किसीमसँ कहियौ नऽ जे नफरत, ई मनमे रखने रहै छै। तइ दुआरे, ई भाषा पाछू छै और, तभी आगा बढ़ि सकैय जब सरकार आ समाज दूनू अइ भाषाके बढ़ाबऽ के लेल आगा अओतइ।

प्रश्न : अपने एखन कोन प्रोजेक्टसबमे व्यस्त छी सर ?

उत्तर:- अखन ओना मैथिलीमे पुरे के पुरे व्यस्त होइतो, हम भोजपुरी सिनेमा सेहो कऽ रहल छी। दू टा सिनेमा खेसारी लाल यादव जीके भोजपुरीमे कऽकऽ अइलीय। ओ आब रिलीज होबए बला छै। और फेरसँ एक जनवरीसँ अक्षरा सिंहके साथमे ओइके सूटमे जाऽ रहल छी।

प्रश्न: अपनेके पहिल रेडियो नाटक कार्यक्रम, टेलीविजन कार्यक्रम आ सिनेमा कोन रहे ? तेकर बारेमे कहल जाए सर।

उत्तर:- हमर रेडियो कार्यक्रम एग्जैक्ट साल हमरा याद नइ अइ लेकिन एते बूझू जे जनकपुर एफ.एम. खूललै तऽ ओइ एफ.एम.के खूललाके एक-दू महिना बादसे जोइन कएने रही, और एकटा कार्यक्रम शूरूवात भेल रहै, ‘प्लीज डौन्ट माइन्ड’। और ओ कार्यक्रम बहुत लोक पसन्द कएने रहै। और एकटा आरो कार्यक्रम रहै, ‘प्लीज डौन्ट माइन्ड” तऽ साप्ताहिक कार्यक्रम रहै, और ‘पर-डे’ जे छै से एकटा आरो कार्यक्रम रहै जनकपुरे एफ. एम.मे ‘अनटोटल’। तकर बाद टेलीविजन पर पहिल कार्यक्रम ‘टेनामेनी’ आएल रहै। आ सिनेमा तऽ बहुते हम कएने छी लगभग दू-दर्जनके आसपास। ‘गरीबक बेटी’, ‘सूहागीन’, ‘जहियासँ गेलहुं वीदेश’, एहने कके बहुत सिनेमा सब छै जइमे हम काज कएने छी, ई मैथिली भेल। भोजपुरी सिनेमामे सेहो काज कएने छी, जेना ‘लगाइ दिय चोलीयाके हूक राजा जी’। तकर बाद दूटा सिनेमा एखन कैएलिय खेसारी लाल यादवके सङ्गमे – अवैध, पार्ट वन आ पार्ट टू। एखन रीलीज नइ भेल छै, पोस्ट प्रोडक्शनके क्रममे छै।

प्रश्न : मैथिलीमे अपने कोनो किताब वा उपन्यास कोनो लेखकके, वा कोनो कविता कोनो लेखकके पढ़ने होइ तऽ ओइ बारेमे किछु कहु सर।

उत्तर:- मैथिलीमे हम बहुतो किताब पढ़ने छी। खास कऽकेऽ नाटक बेसी हम पढ़लीय, महेन्द्र मलंगिया सर जीके तऽ बहुतो नाटक सब पढ़ने छीयै। तेकर बाद अवधेश पोखरेल जीके नाटक सब सेहो पढ़ने छी। आरो बहुते रास किताबसब छै। मलंगिया सरके नाटक सब हमरा बहुत निक लागल अइ। बहुत निक तरिकासँ लिखल, जइमे ‘ओकरा अंगना बारह मासा’ ई जे नाटक छै, ओ हमरा बहुत निक लागल रहे।

प्रश्न : रीना यादव जे रमौलबालीके नामसँ बहुत लोकप्रिय छथि श्रोता एवं दर्शक मध्य, अपनो दूनू गोटे अभिनय जोड़ीक रूपमे मिथिला-नेपालमे बहुत लोकप्रिय छी। तेँ अइ बारेमे सेहो किछु कहल जाए सर।

उत्तर:- रीना यादव बहुत निक अभिनय करऽवाली एकटा बहुत निक अभिनेत्री छथि। हम सब साथे बहुतो स्टेज कार्यक्रम कएली, रेडियो कार्यक्रम कएली, युटयूब पर सेहो बहुत काज कएली। हँ दर्शक-श्रोतासब हमर सभक जोडी़के रूचाइ छथि, नीक लगै छै सायद दर्शक सबकेँ। और हमर सबके जोड़ी… लगभग-लगभग हम सब आठ बेर सेहो विदेशमे जाऽके परफरर्मेंस मलेशिया, कतार, दुबईमे कएने छी। और ओतबे नइ भारतके तऽ लगभग-लगभग मतलब ‘मेन-शहर’ जतेक छै, ओइ सब शहरमे हम सब कार्यक्रम कएने छी। ओ एकटा नीक कलाकार छथि। हमरा सबके अभिनय जोड़ीके श्रोता ओ दर्शकसब पसन्द करै छै, इएह बात छै।

धन्यवाद !

अइ बातकेँ बुझि अभिनेता वैद्यनाथ पटेल सर बहुत हार्दिकताक सङ्ग एहि अन्तरवार्ताक लेल ‘कोअपरेट’ एवं सहयोग कएलथि, तेँ ई अन्तरवार्ता पुरा भऽ सकल। बहुत रास आभार ओ धन्यवाद बैद्यनाथ सरकेँ। अपनहिं सबसँ आग्रह, ilovemithila.com पर लिखल गेल, पोस्ट कैल गेल लेख ओ रचना सब पढ़ी आ अपन परिवार आ साथीसभकेँ सोसल मीडिया सब पर सेहो सेयर करी, से सविनय आग्रह।

कैलाश कुमार ठाकुर

कैलाश कुमार ठाकुर [Kailash Kumar Thakur] जी आइ लभ मिथिला डट कमके प्रधान सम्पादक छथि। म्यूजिक मैथिली एपके संस्थापक सदस्य सेहो छथि। Kailash Kumar Thakur is Chef Editor of ilovemithila.com email - [email protected], +9779827625706

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