Poem

तुर्की कवि नाजीम हिकमतके 3 मैथिलीमे कविता

आई तुर्की कवि नाजीम हिकमतके स्मृति दिवस अछि ।

नाजीम हिकमत, तुर्कीमे जन्मल एहन क्रान्तिकारी कविके नाम अछि, जकर कवितामे क्रान्तिकारी विचारसंगे रुमानियतके अद्भुत संगम भेटैत अछि । सन् १९०१मे जनमल ई कवि अपन ६३ बरसके जीवनमे ४८ बरस कविता मात्र लिखलक ।

अपन क्रान्तिकारी प्रतिबद्धताके कारण १८ बरस जेलमे बितौलक आ १३ बरस निर्वासनमे आन देशसबमे बौआइत रहल । ३ जुन, १९६३के दिन हुनक देहान्त भेल । प्रस्तुत अछि नाजिम हिकमतके किछु कविताके मैथिली
अनुवाद । पहिल खेपमे तीनटा क्रान्तिकारी चेतके कविता ।
(दोसर खेपमे हुनक तीनटा प्रेम कविता परसब)

१. महान मानवता

महान मानवता जहाजके डेकपर यात्रा करैत अइछ
रेलगाडीमे तेसर दर्जाके डिब्बामे
पक्की सड़कपर पैदल
महान मानवता ।

महान मानवता आठबजे कामपर जाइत अइछ
बीस बरखक बयसमे बिआह करैत अइछ
चालीस तक पहुँचैत मइर जाइत अइछ
महान मानवता ।

रोटी बहुत अइछ सबके लेल, महान मानवताके अलाबे
चाउरसंगे सेहो एहे बात
चिन्नीसंगे सेहो एहे बात
कपड़ासंगे सेहो एहे बात
किताबसंगे सेहो एहे बात
पर्याप्त अइछ सबवस्तु सबके लेल, महान मानवताके अलाबे ।

महान मानवताके धरतीपर छाँही नइँ बनैत अइछ
ओकरा सड़कपर बिजली नइँ होइछै
ओकरा खिड़कीपर शीशा नइँ होइछै
मुदा महान मानवतालग उमेद होइछै
उमेदके बिना अहाँ जीवित नइँ रहि सकैछी ।

२. उदास स्वतन्त्रता

तोँ बेच दैछे
अपन आँइखक सतर्कता, अपन हाथक चमक,
तोँ कटैछे लोइया जिनगीके रोटीके लेल,
मुदा कहियो एक्को टुकड़ाके स्वाद नइँ चिखैछे
तो एकटा गुलाम छे अपन महान स्वतन्त्रतामे खटनाहरसब !
अमीरसबके आ अमीर बनाब’के लेल नरक भोग’के स्वतन्त्रतासंगे
तोँ स्वतन्त्र छे !

जहिना तोँ जन्म लैछै, कर’ लगैछे काम आ चिन्ता,
झूठके पवनचक्की गाइड़ देल जाइत अइछ तोहर दिमागमे ।
अपन महान स्वतन्त्रतामे अपन हाथमे थाम्हिलैत छे तोँ अपन माथ ।
अपन अन्तःकरणके स्वतन्त्रतासंगे
तोँ स्वतन्त्र छे !

तोहर सिर अलग क’देल गेल छौ धड़ स ।
तोहर हाथ झूलैत छौँ तोहर दुनू कात ।
अपन बेरोजगार होबाक महान स्वतन्त्रतासंगे
तो स्वतन्त्र छे !

तो असीम प्रेम करैछे अपन देश स,
मुदा एक दिन, उदाहरणके लेल, एक्केटा दस्तखतमे
ओकरा अमेरिकाके हबाले क’देल जाइत अइछ
आ संगे तोहर महान स्वतन्त्रता सेहो ।
ओकर हवाई अड्डा बनबाक अपन स्वतन्त्रतासंगे
तोँ स्वतन्त्र छे !

वालस्ट्रीट तोहर गर्दन गछेरैछौँ
ल’लैछौ तोरा अपन कब्जामे ।
एकदिन ओ तोरा पठा सकैछौ कोरिया,
जतह अपन महान स्वतन्त्रतासंगे तोँ भइर सकैछे एकटा कब्बर ।
एकटा गुमनाम सिपाही बनबाक स्वतन्त्रतासंगे
तोँ स्वतन्त्र छे !

तो कहैछे तोरा एकटा मनुख्खजका जीबाक चाही,
एकटा औजार, एकटा संख्या, एकटा साधनजका नइँ ।
तोहर महान स्वतन्त्रतामे ओ हथकड़ी पहिरादैछौ तोरा ।
गिरफ्तार होब’, जहल जाय, एत्त तक कि
फाँसीपर लटक’के अपन स्वतन्त्रतासंगे
तोँ स्वतन्त्र छे !

तोहर जीवनमे लोहाके कोनो फाटक नइँ,
बाँसके टाटी वा टाटक पर्दा तक नइँ ।
स्वतन्त्रता चुनबाक जरुरते किया अइछ भला –
तोँ स्वतन्त्र छे !
तरेगन स भरल राइतके निच्चा बड्ड उदास अइछ ई स्वतन्त्रता !

३. उमेद

……..
हम कविता लिखैछी
मुदा ओकरा केओ नइँ छपैत अइछ
एकदिन एहन जरुर आयत जहिया छपत हमर कवितासब ।
हमरा प्रतीक्षा अइ एकटा चिठ्ठीके
जइमे आएत कोनो नीक खबर
भ’ सकैय ओकर आबके दिन वेहे हो
जइ दिन हम लेब’लागी अन्तिम साँस…
मुदा एना नइँ भ’सकैय
जे नइँ आबे ओ चिठ्ठी ।
दुनियाँ सरकार आ धन नइँ चलबैत अइछ
दुनियाँके चलाब’बला अइछ जनता
भ’सकैय हमर कहल बात साँच होब’मे लागे
सैकड़ो साल
मुदा एना होयत जरुर ।

अनुवाद कर्ता

— रोशन जनकपुरी

Vidyanand Bedardi

Vidyanand Bedardi is Editor of Ilovemithila.com . Poet, Lyricist, Maithili Activist. he is from Rajbiraj, Saptari. विद्यानन्द वेदर्दी जी एहि वेबसाइटके सम्पादक छथि। Email - [email protected]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button