Poem

मैथिली कविता: डा.शेफालिका वर्मा

प्रस्तुत अछि गद्य मैथिली कविता...

मैथिली कविता १ ‘मधुकरी एहि विश्व विपिनक हम सरल शेफालिका छी ।

ख़सि पडल आकाससँ जे विकच तरकमालिका छी ‘ ……..
आरसी केर शब्द धरा पर घिंची अनलक आइ हमरा
नेह उपवन मे विहंसि
ओस अश्रु अछि प्रिय हमरा
स्नेह सं बनल ई संसार
हम छी बनल स्नेह-संभार सं
किछ अपूर्व पाबि लेलों जीवन झरनाक जलधार सं
मिटवा में जनलौं हम सुखक मदिर-मधु स्वाद
आनक हित लैत साँस
निज अंतर में भरैत अवसाद
जीवन लागैत छल हास भरल
बासंती विभा हुलास भरल
कोनो बीन ह्रदय में बाज’ लगैत छल
कोनो पाजेब गाब’ लागैत छल
मोहक सम्मोहक संगीत एकटा
मोन-प्राण मे साज लगैत छल !
ह्रदय उषाकाल में नहा गेल
शोभा में सुस्मिति बहा गेल
भरि जायत अछ तुषार तरंग सँ
रंगि जायत अछ भोरक रंग सं
अपनहि चेतना तरंगित भ’ जायत अछि
अपनहि सुधि हेरा जायत अछि
नव सूर्योदय में नेने प्राणक आकुल आह्वान
नव उषा में नित्य समर्पणक
मधु मधुर तान मधु मधुर तान…

मैथिली कविता २ मौनक भाषा

चलु परछाहीँक पार
हम घुमि आबी
लिखल जे साँसक गाथा
मौनक भाषा मे
ओकरे हम गुनगुनाबी !
दर्द प्राण मे अहाँक स्मृतिक
बिलखि बिलखि
छटपटा रहल
आहत गीत
उमड़ि उमड़ि
बैसि अधर पर
कुहरि रहल !
साँझक दम तोड़ैत बेला
मधु मधुर बसातक कम्पन
इजोरिया बैसि लिख रहल
ओ भाषा जे नहि कहि सकलहुँ
हम अहाँके
नहि कहि सकलहुँ
अहाँ हमरा
चलु तखन इजोरिया सँ
अपन अहाँक मूक गाथा
पूछि आबि
मौनक भाषामे ओकरे हम गुनगुनाबी,,,,,,,

मैथिली कविता ३ अव्यक्त प्रेम

आह !
अहाँक ई अप्रत्याशित चलि गेनाय
सोनजूही तारा मौलाय गेल
सिंगरहारि बसात थम्हि गेल
चान निष्प्रभ भ गेल !
आ रजनी ?
तनक घोर कालिमा में लेपटल
सिसकीक सनेस नेने मूर्च्छिता
धराक आंगन में पड़ल
निर्वाक निर्वात दीपशिखा सन
सांसक उठैत गिरैत लहरि मे कम्पित
धड़कब दबौने क रहल
प्रतीक्षा प्रतीक्षा प्रतीक्षा
आओर
आय अहाँक अयबाक दिन अछि
चिर अभीप्सित मिलनक संकल्प सँ
सिंगरहारि बतासक
अकम्पित वीचि पर
सोनजूही तारा पर हास्यक वरदान आयल !
उन्मीलित नयन मे भरि अर्चना
चिर व्यथा मिलन -पथ सजव लगलीह
कम्पन में स्मृतिक सुरभि नुकाय
भावना मे प्रेमक विश्वास सजव लगलीह
पुनः अहाँक मौन !
हमरा अहाँक मध्य कतेको कविता
कहि जायत गावि जायत
हे हमर मौन प्रेम मुखर भ
अहाँ अभिव्यक्त भ जायब
अहाँ मौन रहु
हमर अव्यक्त !
अहाँक मौन हमर पूजा थीक
हमर प्रेम थीक —-

मैथिली कविता ४ किछ प्रश्न

कखनो काल आँखिमे
मसानक शून्यता उतरि जाइत अछि
हृदयक रक्त जमि
अहिल्या बनि जाइत अछि
भूखक जंगल मे
रक्त रंजित शतदल विहुँसैत अछि
तथाकथित
सभ्यता आ संस्कृति सँ अंतर
क्षत विक्षत भ उठैत अछि
तखन
मोने उठैत अछि किछ प्रश्न

जनक सँ पुछवा लेल एकटा प्रश्न
अहाँ किएक सीता संग एतेक
सनेस देलहुँ
राज क राज लुटाय
नारीकेँ दहेजक आगिमे झोंकि देलहुँ
किएक दहेज परम्पराकेँ जन्म देलहुँ

संदर्भिक समाचार

मोन फेर ओनायत अछि
सीता सँ पुछवा लेल एक टा प्रश्न
सीता !
अहाँ किएक स्वीकारलहुँ रामक
अग्निपरीक्षाके
शक्ति रहितो शोषित बनि
वनक निर्वासनकेँ
अहाँ किएक मौन परम्पराके
जन्म देलहुँ
अहाँ किएक नारी जीवन शोक संतप्त केलहुँ

आय राम राजक लीला देखू
टाका क हवस एना लागि गेल देस मे
दशरथ घूमि रहलाह व्यापारिक वेश मे
कौशल्या जोखि रहलीह
राम कें वस्तु-बाँट मे
वाह वाही द रहल धो…

मैथिली कविता ५  सत्य ,असत्य

जखन जखन हम
सत्य कें खोजबा लेल चाहलहुँ
असत्य सामने आबि
मुस्की मार’ लागल
मोन हमर हार’ लागल
रेतक देवार पर
लहरि क तट पर इजोरिया सजेइत रहलहुँ
प्रत्येक चेहरा पर ओढल नकाब
गाछक छाल जकाँ
घिचैत रहलहुँ
कतेक कठोर रूप एहि सत्यके
केहेन मारुक
तपैत मरुथलमे
खाली पैरे भगैत रहलहुँ
जीवन स प्रत्येक पल
समझौता करैत रहलहुँ
संस्कार के बनेवा लेल
व्यवस्थाक प्रपंच केँ
कुचलबा लेल
पता नहि कहिया कोना
एहि व्यवस्थाक अंग जेना बनि गेलहुँ
अहाँ हमरे असत्य बना देलहुँ
जत’ जत’ जितवाक आस छल
ओहिठाम हारि गेलहुँ.
अपन आँचर
आनक नोर सँ तिताय लेलहुँ,,,,,

कवियत्री

मैथिली कविताइतिहासमे नाम केकर लिखाबै छै ? : युवा सक्षमता दिवस, i love mithila ,Maithili Ghazal ,,Gajendra gajur

डा. शेफालिका वर्मा

Ugana Shankar Thakur

He is editor of i love mithila

३ Comments

  1. वाह ! प्रशंसनिय काज बहुत सुन्दर लागल , मिथिला आ मैथिली सभक गौरव, ilovemithila.com क निर्माण करबाक लेल बहुत बहुत धन्यवाद ! आ संगे अपने सबक बहुत बहुत शुभकामना अछि । अपन माईट पाईनसँ जुरल सब किछु आब Digital माध्यमसँ सेहो भेटत बहुत निक डेग अछि । हम सब ilovemithila के संग रहब ।
    जय मिथिला🙏 जय मैथिली 🙏

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